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पूर्व माओवादी कराएंगे नसबंदी रिवर्सल
पूर्व माओवादी कराएंगे नसबंदी रिवर्सल
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हिंसा का रास्ता छोड़ अब परिवार बसाने की चाह... 200 से अधिक पूर्व माओवादी कराएंगे नसबंदी रिवर्सल

बस्तर में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे 200 से अधिक पूर्व माओवादी अब परिवार बसाने और पिता बनने की उम्मीद में नसबंदी रिवर्सल कराना चाहते हैं। प्रशासन विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करने की तैयारी कर रहा है, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टर उनकी जांच और जरूरी सर्जरी करेंगे। पहले भी करीब 50 आत्मसमर्पित माओवादियों की ऐसी सर्जरी की जा चुकी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 20 Aug 2026, 01:29 PM · अपडेट: 05 Oct 2026, 04:26 PM
बस्तर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से एक मानवीय और बेहद राहत देने वाली खबर सामने आ रही है। माओवादी संगठन का काला साया छोड़कर मुख्यधारा में लौटे सैकड़ों युवा अब एक सामान्य ज़िंदगी और अपने परिवार का सपना देख रहे हैं। कभी हिंसा के रास्ते पर जबरन ढकेले गए और नसबंदी का दंश झेल चुके ये युवा अब फिर से पिता बनने की उम्मीद में डॉक्टर की दहलीज तक पहुंच रहे हैं। नक्सली संगठन में भर्ती के वक्त युवाओं पर शादी न करने और बच्चे न पैदा करने का दबाव बनाया जाता था, जिसके तहत कई लड़कों की नसबंदी करा दी जाती थी। लेकिन अब सरेंडर कर चुके 200 से अधिक पूर्व माओवादी अपना घर बसाने के लिए नसबंदी की प्रक्रिया (रिवर्सल सर्जरी) को उलटने के लिए तैयार हो गए हैं। 

देश के नामचीन डॉक्टरों की बुलाई जाएगी टीम 

प्रशासन इसे पुनर्वास नीति के एक अहम और संवेदनशील हिस्से के रूप में देख रहा है। राज्य के उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने हाल ही में पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और इस दिशा में तुरंत कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इन युवाओं की मांग को देखते हुए बस्तर में जल्द ही एक विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करने की तैयारी है। इसके लिए देश के नामचीन विशेषज्ञ डॉक्टरों और यूरोलॉजिस्ट की टीम बुलाई जाएगी। 

अभी के लिए ये सुविधा केवल पुरूषों के लिए 

डॉक्टर पहले युवाओं की चिकित्सकीय जांच करेंगे और उसके बाद नसबंदी खोलने की जरूरी सर्जरी की प्रक्रिया शुरू होगी। फिलहाल यह सुविधा केवल पुरुष माओवादियों के लिए सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि अब तक नसबंदी खुलवाने के जितने भी आवेदन या आग्रह मिले हैं, वे सभी पुरुषों की तरफ से हैं। महिला कैडर को इसमें शामिल किया जाएगा या नहीं, इस पर स्थिति आगे साफ होगी। यह कोई पहला मौका नहीं है जब बस्तर में इस तरह का प्रयास किया जा रहा है। 

युवाओं के लिए नई उम्मीद 

बस्तर के एसएसपी शलभ सिन्हा के मुताबिक, पहले भी सुकमा और आसपास के इलाकों में ऐसे शिविर लगाए जा चुके हैं। तब 'यूरोलॉजिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया' के डॉक्टरों ने करीब 50 आत्मसमर्पित माओवादियों का सफल ऑपरेशन किया था। प्रशासन के इस उत्साह की सबसे बड़ी वजह राजनांदगांव की एक सफलता है, जहां नसबंदी खुलने के बाद चार आत्मसमर्पित युवाओं ने शादी की और अब वे बच्चों के पिता बन चुके हैं। यह सफलता मुख्यधारा में लौटने वाले अन्य युवाओं के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरी है।
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