India Defense Production: इस्लामाबाद भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और उत्पादन की रफ्तार बढ़ाने के लिए उठाए गए हालिया कदमों ने पड़ोसी देश पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ा दी है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा निजी कंपनियों को संवेदनशील तकनीक ट्रांसफर करने के फैसले से इस्लामाबाद के रक्षा विशेषज्ञ और नीति निर्माता बेहद सहमे हुए हैं। पाकिस्तान के प्रमुख थिंक-टैंक 'सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्ट्रैटजिक स्टडीज' (CISS) के रिसर्च फेलो यासिर हुसैन ने इस बदलाव पर गहरा विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उनका मानना है कि भारत की इस नई नीति का सीधा और व्यापक असर दक्षिण एशियाई क्षेत्र के रणनीतिक संतुलन पर पड़ने वाला है।
क्या है भारत की नई नीति, जिसने बढ़ाई हलचल?
दरअसल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में DRDO को यह अधिकार दिया है कि वह निजी क्षेत्र के रक्षा निर्माताओं को अत्याधुनिक मिसाइल तकनीक ट्रांसफर (Technology Transfer) कर सके। इसके तहत जमीन से जमीन पर मार करने वाली क्रूज मिसाइलें, हवा से हवा और जमीन से हवा में मार करने वाले डिफेंस सिस्टम, एंटी-रेडिएशन मिसाइलें और गाइड-एंटी टैक वेपन्स अब प्राइवेट कंपनियां भी बना सकेंगी। इसके साथ ही, ISRO ने भी 'IN-SPACe' के जरिए स्पेस और रॉकेट टेक्नोलॉजी में निजी भागीदारी के दरवाजे खोल दिए हैं। भारत सरकार का यह कदम रक्षा उत्पादन में एक क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है।
सरकारी एकाधिकार का अंत और 'अमेरिकन मॉडल' की ओर कदम
पाकिस्तानी विश्लेषकों का कहना है कि भारत आजादी के बाद से ही मिसाइल और रॉकेट सिस्टम के निर्माण पर सख्त सरकारी नियंत्रण बनाए हुए था। लेकिन अब यह रुख पूरी तरह बदल चुका है। यासिर हुसैन के मुताबिक, भारत का यह कदम अमेरिका के 'मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स' (MIC) मॉडल की तरह है। इस मॉडल में निजी रक्षा कंपनियां न सिर्फ उत्पादन बढ़ाती हैं, बल्कि हथियारों के निर्यात और लगातार मांग को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।पाकिस्तान का अजीब तर्क: 'कारोबारी मुनाफे के लिए बढ़ेगा तनाव'
भारतीय निजी रक्षा कंपनियों (जैसे अडानी डिफेंस एंड एरोस्पेस व अन्य) के इस क्षेत्र में उतरने पर पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स ने एक अलग ही दलील दी है। उनका कहना है कि जब निजी कंपनियां रिसर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैनपावर में भारी पूंजी निवेश करेंगी, तो उन्हें अपना कारोबार चलाने और मुनाफा कमाने के लिए लगातार बड़े ऑर्डर्स की जरूरत होगी। पाकिस्तान का दावा है कि हथियारों की लगातार मांग और खपत केवल युद्ध या क्षेत्र में बने तनाव के माहौल से ही संभव हो सकती है। इस्लामाबाद का आरोप है कि इस आर्थिक गणित के कारण दक्षिण एशिया में अनजाने में तनाव और हथियारों की होड़ (Arm Race) को बढ़ावा मिल सकता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर को लेकर जताया डर
CISS के रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भारत द्वारा उठाया गया यह कदम पूरे दक्षिण एशिया के सुरक्षा ढांचे को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पहले से ही सीमा विवादों और परमाणु क्षमता वाले इस क्षेत्र में मिसाइल निर्माण की तेज रफ्तार मौजूदा कूटनीतिक और सुरक्षा तंत्र पर भारी पड़ सकती है।

