Jashpur News: स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की उम्र कम होने के कारण दूषित पानी का सेवन उनके स्वास्थ्य के लिए ज्यादा जोखिम पैदा कर सकता है। खेतों या नाले से बहकर आने वाले पानी में गंदगी और अन्य हानिकारक तत्व होने की आशंका रहती है। ऐसे पानी का लगातार इस्तेमाल करने से बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए स्कूल में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था को जल्द बहाल करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
बारिश के दिनों में बढ़ सकती है परेशानी
बारिश के मौसम में आसपास के खेतों और नालियों से बहकर आने वाले पानी में गंदगी बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे समय में बच्चों का इस पानी पर निर्भर रहना और भी चिंताजनक हो जाता है। यदि हैंडपंप की मरम्मत में और देरी होती है, तो आने वाले दिनों में बच्चों के सामने पेयजल की समस्या और गंभीर हो सकती है। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन इस मामले को प्राथमिकता से लेते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करे।
स्कूल में वैकल्पिक पानी की व्यवस्था की मांग
हैंडपंप की मरम्मत होने तक स्कूल में टैंकर, पानी के ड्रम या किसी अन्य सुरक्षित माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे बच्चों को नाले या खेतों से बहकर आने वाले पानी का इस्तेमाल करने की मजबूरी नहीं रहेगी। ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी समाधान के साथ-साथ तत्काल राहत के लिए भी विभाग को कदम उठाना चाहिए, ताकि स्कूल आने वाले बच्चों की सेहत से किसी तरह का समझौता न हो।ग्रामीणों ने जल्द कार्रवाई की उठाई मांग
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों की चिंता अब इस बात को लेकर है कि आखिर बच्चों को सुरक्षित पानी कब मिलेगा। उनका कहना है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि जरूरी बुनियादी व्यवस्था है। ऐसे में खराब हैंडपंप को जल्द ठीक कराने के साथ भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए भी स्थायी व्यवस्था किए जाने की जरूरत है।
विभाग के आश्वासन पर टिकी नजर
बीईओ सुदर्शन पटेल की ओर से तकनीकी टीम को हैंडपंप जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए जाने के बाद अब विभाग की कार्रवाई का इंतजार है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संबंधित टीम जल्द मौके पर पहुंचेगी और खराब हैंडपंप को ठीक कर देगी। फिलहाल बच्चों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है और सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन कब तक इस समस्या का समाधान करता है।

