Kapil Sibal: सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई के दौरान उस वक्त तीखी बहस देखने को मिली, जब वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने अदालत की कार्यप्रणाली और मामलों की लिस्टिंग प्रक्रिया में एक खास 'पैटर्न' होने का मुद्दा उठाया। सिब्बल के इस बयान पर पीठ की अगुवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाया और न्यायिक आत्ममंथन पर जोर देते हुए टिप्पणी की कि "हमें पहले खुद आईना देखना चाहिए।" यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा के 10 तृणमूल कांग्रेस (TMC) बागी विधायकों की अयोग्यता याचिका से जुड़ा हुआ है।
बंगाल विधानसभा स्पीकर की कार्यशैली पर सवाल
मामले की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने बंगाल विधानसभा के स्पीकर की भूमिका पर गहरी चिंता व्यक्त की। दलबदल विरोधी कानून के तहत बागी विधायकों पर लंबे समय से कोई फैसला न होने को लेकर अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को अपनी जिम्मेदारियों का समयबद्ध तरीके से पालन करना चाहिए।
फैसले के लिए 3 महीने की समय-सीमा तय
शीर्ष अदालत ने इस मामले में रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष समय-सीमा की गंभीरता को अच्छी तरह समझते हैं। बेंच ने औपचारिक रूप से यह उम्मीद जताई है कि स्पीकर आगामी 3 महीने के भीतर बागी TMC विधायकों की अयोग्यता याचिका पर अपना अंतिम निर्णय सुनाएंगे। न्यायिक समीक्षा की दृष्टि से सुप्रीम कोर्ट का यह रुख बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ समय से राज्यों की विधानसभाओं में दलबदल मामलों पर फैसले लटकाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। अदालत के इस सख्त निर्देश से अब बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
