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Prince Alois Visit to India (Image Source: social media)
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Liechtenstein: आल्प्स की गोद में बसा वह अनूठा देश, जिस पर एक रुपए का भी कर्ज नहीं, प्रिंस एलॉइस के भारत दौरे से क्यों गहरे हो रहे रिश्ते?

Liechtenstein: यूरोप का छोटा लेकिन बेहद समृद्ध देश लिकटेंस्टीन अपनी प्राकृतिक सुंदरता, कम बेरोजगारी, मजबूत अर्थव्यवस्था और अनूठी खूबियों के लिए जाना जाता है। प्रिंस एलॉइस की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक साझेदारी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 27 Oct 2026, 12:06 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Liechtenstein: ऊंचे-ऊंचे पहाड़, चारों तरफ फैली हरियाली और पर्वतों की चोटियों पर बने किलेनुमा घर—ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड के बीच मध्य यूरोप में बसा लिकटेंस्टीन किसी परीकथा के देश जैसा नजर आता है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के अलावा यह देश अपनी बेजोड़ अमीरी और अनूठी खूबियों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। महज 40 हजार की आबादी वाले इस खूबसूरत देश की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस पर एक रुपये का भी कर्ज नहीं है। इसी समृद्ध देश के युवराज (प्रिंस) एलॉइस इन दिनों भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में उनका भव्य स्वागत किया गया, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी आगवानी की। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों की इस नई इबारत के बीच आइए जानते हैं कि इस छोटे से देश की और क्या-क्या दिलचस्प खासियतें हैं।

लिकटेंस्टीन की वे खास बातें, जो इसे दुनिया से अलग बनाती हैं

  • आधे घंटे में पूरा देश सफर: अगर आप लिकटेंस्टीन की सड़कों पर बिना रुके लगातार आधे घंटे तक गाड़ी चला लें, तो समझ लीजिए कि आपने लगभग पूरा देश घूम लिया है।

  • नकली दांतों का ग्लोबल गढ़: दुनिया भर में जितने भी नकली दांत बनाए जाते हैं, उनमें से अकेले 20 फीसदी हिस्सेदारी इसी देश की मशहूर कंपनी 'इवोक्लार विवाडेंट' की है।

  • सेना और एयरपोर्ट का न होना: इस देश ने सन 1868 में ही अपनी सेना हमेशा के लिए खत्म कर दी थी। यहां कोई एयरपोर्ट भी नहीं है, और सुरक्षा व हवाई यात्रा से जुड़ी जरूरतों के लिए यह पूरी तरह पड़ोसी देश स्विट्जरलैंड पर निर्भर है।

  • जीरो क्राइम रेट: इस मुल्क में अपराध का आंकड़ा लगभग शून्य है। लोग अपने घरों के दरवाजों पर ताले तक नहीं लगाते। यदि किसी को दो साल से ज्यादा की सजा हो जाए, तो उसे जेल में रखने के लिए पड़ोसी देश ऑस्ट्रिया भेज दिया जाता है।

  • बेरोजगारी न के बराबर: लिकटेंस्टीन बेहद समृद्ध अर्थव्यवस्था है। यहां हर कोई किसी न किसी कारोबार से जुड़ा है, जिसके चलते बेरोजगारी दर 2 फीसदी से भी कम है।

  • 'टैक्स हेवन' और कंपनियों का बाजार: यह देश निवेशकों के लिए स्वर्ग माना जाता है। हैरानी की बात यह है कि यहां पंजीकृत कंपनियों की संख्या कुल आबादी (करीब 40 हजार) से भी ज्यादा है।

    • छोटा आकार, बड़ा रुतबा: मात्र 160 वर्ग किलोमीटर में फैला यह देश दुनिया के सबसे अमीर राष्ट्रों में शुमार है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों के मुताबिक, क्षेत्रफल में छोटा होने के बावजूद यहां की प्रतिलिपि प्रति व्यक्ति GDP दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में गिनी जाती है।
    • डबल लैंडलॉक्ड भूगोल: लिकटेंस्टीन उन दुर्लभ देशों में से है जो 'डबल लैंडलॉक्ड' हैं—यानी न केवल इस देश के पास कोई समुद्री तट नहीं है, बल्कि इसके सभी पड़ोसी देश भी समुद्र से घिरे नहीं हैं।

    • भाषा और संस्कृति: यहां की आधिकारिक भाषा जर्मन है, जो इसके पड़ोसी देशों ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड के कुछ हिस्सों में भी बोली जाती है।

  • छोटा आकार, बड़ा रुतबा: मात्र 160 वर्ग किलोमीटर में फैला यह देश दुनिया के सबसे अमीर राष्ट्रों में शुमार है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों के मुताबिक, क्षेत्रफल में छोटा होने के बावजूद यहां की प्रतिलिपि प्रति व्यक्ति GDP दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में गिनी जाती है।
  • डबल लैंडलॉक्ड भूगोल: लिकटेंस्टीन उन दुर्लभ देशों में से है जो 'डबल लैंडलॉक्ड' हैं—यानी न केवल इस देश के पास कोई समुद्री तट नहीं है, बल्कि इसके सभी पड़ोसी देश भी समुद्र से घिरे नहीं हैं।

  • भाषा और संस्कृति: यहां की आधिकारिक भाषा जर्मन है, जो इसके पड़ोसी देशों ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड के कुछ हिस्सों में भी बोली जाती है।

भारत की यात्रा पर उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल 

लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलॉइस की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। प्रिंस के साथ उनकी पत्नी प्रिंसेस सोफिया, कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और देश के प्रमुख उद्योग जगत के नेता भी भारत पहुंचे हैं। सोमवार को नई दिल्ली पहुंचने पर हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिंह ने उनका औपचारिक स्वागत किया। इससे पहले प्रिंस एलॉइस रविवार को मुंबई पहुंचे थे।

क्यों खास है प्रिंस एलॉइस का यह दौरा? 

वर्ष 2026 में प्रिंस एलॉइस की यह दूसरी भारत यात्रा है। इससे पहले वह फरवरी के महीने में नई दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' में शामिल होने आए थे, इसके अलावा वह 2010 और 2018 में भी भारत का दौरा कर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले साल (2025) में 'भारत-ईएफटीए (EFTA) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते' के लागू होने के बाद यह दौरा दोनों देशों के लिए नए क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने, व्यापारिक दूरियों को पाटने और अपने पारंपरिक मैत्रीपूर्ण संबंधों को और अधिक मजबूत करने का एक बेहतरीन अवसर लेकर आया है।
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