प्रकाशित: 07 Oct 2026, 09:57 AM· 7 मिनट पढ़ने का समय
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Mahasamund Sand Mining: महानदी के किनारे बसे महासमुंद जिले के बरबसपुर गांव में रेत खनन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस समय नदी से रेत खनन पर रोक होने की बात कही जा रही है, उसी दौरान बरबसपुर के रेत घाट पर रात के अंधेरे में रेत लोडिंग की गतिविधियां सामने आईं। 4 अक्टूबर को दिन में घाट का जायजा लेने पहुंची कीर्तिमान की टीम को नदी से बाहर आने वाले रास्ते पर भारी वाहनों के आवाजाही के निशान, रेत से सनी JCB और नदी के बीचों-बीच फंसी रेत की ट्रॉली दिखाई दी।
इन परिस्थितियों ने खनन गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े किए। इसके बाद रात में दोबारा मौके की पड़ताल की गई। तड़के करीब 3 बजे घाट पर पहुंचे तो वहां एक साथ कई ट्रैक्टरों में रेत लोड किए जाने का दृश्य सामने आया। मौके पर रेत से भरे वाहन लगातार बाहर निकलते दिखाई दिए। अब सवाल यह है कि यदि उस समय आधिकारिक रूप से रेत खनन की अनुमति नहीं थी, तो रात के अंधेरे में घाट पर यह गतिविधि किसकी अनुमति से चल रही थी?
पहले दिन घाट पर मिले खनन के संकेत
बरबसपुर के रेत घाट पर 4 अक्टूबर को दिन में पहुंचने पर नदी से बाहर आने वाले रास्ते पर भारी वाहनों के पहियों के गहरे निशान दिखाई दिए। रास्ते पर ट्रैक्टर, ट्रक और JCB जैसे भारी वाहनों की आवाजाही के स्पष्ट निशान नजर आए। घाट से कुछ दूरी पर एक JCB भी खड़ी थी। उसके आगे के हिस्से और इंजन के आसपास रेत चिपकी हुई दिखाई दी। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक था कि यदि कई महीनों से नदी में रेत खनन पर रोक थी, तो JCB का इस्तेमाल हाल में किस काम के लिए किया गया?
हालांकि, केवल JCB पर रेत लगे होने से यह निश्चित रूप से साबित नहीं होता कि उसका इस्तेमाल उसी दिन अवैध रेत खनन के लिए हुआ था। इसी वजह से मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए आगे पड़ताल की गई।
नदी के बीच फंसी मिली रेत से भरी ट्रॉली
इसी दौरान नदी के बीचों-बीच एक ट्रैक्टर की ट्रॉली फंसी हुई दिखाई दी। ट्रॉली का एक पहिया फटा हुआ था, जिसके कारण उसे बाहर नहीं निकाला जा सका था। ट्रॉली के अंदर रेत मौजूद थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि रेत को खाली करने का प्रयास किया गया था, लेकिन ट्रॉली पूरी तरह खाली नहीं हो पाई थी। यहीं से सवाल और गंभीर हो गया। बारिश के मौसम में जब नदी का जलस्तर अधिक था, तब नदी के बीच खड़ी यह ट्रॉली पानी में डूब जाती। ऐसे में यदि ट्रॉली का इस्तेमाल कई महीने पहले किया गया होता तो उसमें इस तरह रेत मौजूद मिलने की स्थिति पर सवाल उठता है। हालांकि, इस ट्रॉली के घाट तक पहुंचने का सटीक समय और इसके इस्तेमाल की तारीख की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
बरबसपुर के ग्रामीणदिन में सवाल, रात में मिला जवाब?
घाट पर दिखाई दिए इन संकेतों के बाद यह आशंका बनी कि संभव है कि दिन के बजाय रात में रेत निकाली जा रही हो। इसी संभावना की पड़ताल के लिए अगले दिन तड़के करीब 3 बजे दोबारा बरबसपुर के घाट पर टीम दोबारा पहुंची । अंधेरे में घाट पर जो दृश्य सामने आया, उसने दिन में दिखाई दिए संकेतों और आशंका को तस्वीर में बदल दिया। मौके पर एक साथ कई ट्रैक्टरों में रेत लोड की जा रही थी। रेत से भरे वाहन लगातार घाट से बाहर निकल रहे थे। मौके की गतिविधियों से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि रेत की लोडिंग और परिवहन रात के समय जारी था।
अब यह जांच का विषय है कि मौके पर चल रही गतिविधि के लिए किसी प्रकार की वैध अनुमति थी या नहीं और यदि अनुमति नहीं थी तो यह खनन किसके द्वारा और किस स्तर पर संचालित किया जा रहा था।
जिले में रोकथाम के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड और टास्क फोर्स
रेत के अवैध खनन और परिवहन पर कार्रवाई के लिए जिले में प्रशासनिक स्तर पर फ्लाइंग स्क्वॉड और स्पेशल टास्क फोर्स जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इनमें SDM, तहसीलदार, थाना प्रभारी समेत संबंधित अधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं। ऐसे में बरबसपुर जैसे घाट पर रात के समय भारी संख्या में वाहनों की आवाजाही और रेत लोडिंग की गतिविधि सामने आना इन निगरानी व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करता है। यदि घाट पर चल रही गतिविधि नियम विरुद्ध पाई जाती है तो यह भी जांच का विषय होगा कि इतनी बड़ी मात्रा में वाहन रात के समय घाट तक कैसे पहुंचते रहे और निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली।
जिला खनिज अधिकारी को दी गई सूचना
मामले की जानकारी जिला खनिज अधिकारी बाबूलाल नागेश को दी गई। उन्होंने बताया कि उन्हें भी इस संबंध में सूचना मिली है और मामले में कार्रवाई की जा रही है। अब प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि बरबसपुर घाट पर रात में चल रही गतिविधि अधिकृत थी या नियमों का उल्लंघन कर रेत निकाली जा रही थी।
ग्रामीणों की परेशानी: "बस्ती के बीच से गुजर रहे भारी वाहन"
मामला सिर्फ रेत खनन तक सीमित नहीं है। बरबसपुर के ग्रामीण भारी वाहनों की आवाजाही से भी परेशान हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, नदी से निकलने वाली रेत को ट्रैक्टर और हाईवा वाहनों के जरिए गांव की बस्ती के बीच से ले जाया जा रहा है। उनका कहना है कि गांव का रास्ता ज्यादा चौड़ा नहीं है और भारी वाहनों के लगातार आवागमन के लिए भी उपयुक्त नहीं है। सड़क के दोनों ओर लोगों के घर हैं। ऐसे में बच्चों के स्कूल जाने, खेलने या परिवार के सदस्यों के घर से बाहर निकलने के दौरान तेज रफ्तार भारी वाहनों से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का दावा है कि पहले भी बच्चे सड़क पर ट्रैक्टर और हाईवा वाहनों के सामने गिर चुके हैं। उनका यह भी आरोप है कि अब तक मोहल्ले के चार कुत्तों की भारी वाहनों की चपेट में आने से मौत हो चुकी है।
ग्रामीणों ने किया चक्काजाम, पंचों पर दुर्व्यवहार का आरोप
भारी वाहनों की आवाजाही से परेशान ग्रामीणों ने कथित तौर पर बीती रात चक्काजाम भी किया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या के विरोध में आवाज उठाई तो गांव के सभी पंच एकत्रित हुए और उन्हें धमकाने का प्रयास किया गया। महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किए जाने का ग्रामीणों ने आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि रेत परिवहन के लिए गांव के बाहर से अलग रास्ता भी बनाया गया है, लेकिन इसके बावजूद भारी वाहनों को बस्ती के बीच से ले जाया जा रहा है।
अलग रास्ता होने के बावजूद बस्ती से क्यों गुजर रहे वाहन ?
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि रेत परिवहन के लिए गांव के बाहर से वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध है, तो भारी वाहनों को बस्ती के बीच से क्यों निकाला जा रहा है? उनका कहना है कि लगातार ट्रैक्टर और हाईवा गुजरने से सड़क को नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही लोगों की सुरक्षा भी खतरे में है। ग्रामीण चाहते हैं कि रेत परिवहन के लिए बने मार्ग का ही इस्तेमाल हो और बस्ती के बीच से भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई जाए।
बरबसपुर में पहले भी सामने आ चुके हैं रेत खनन के मामले
बरबसपुर में रेत खनन को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। पिछले वर्ष इन्हीं घाटों से बड़ी मात्रा में अवैध रेत जब्त किए जाने की कार्रवाई सामने आई थी। बताया गया था कि करीब 2.5 लाख क्यूबिक मीटर रेत जब्त की गई थी। बाद में जब्त रेत की नीलामी से करीब 7.5 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई थी। इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी यदि उसी क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन की शिकायतें और रात में रेत लोडिंग की गतिविधियां सामने आती हैं तो यह प्रशासन के लिए गंभीर सवाल है।
अब कार्रवाई पर टिकी नजर
बरबसपुर के घाट पर दिन में मिले खनन गतिविधियों के संकेत और रात में दिखाई दी रेत लोडिंग की गतिविधि के बाद अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। सबसे अहम सवाल यही है कि क्या घाट पर चल रही गतिविधियां वैध थीं? यदि अनुमति नहीं थी तो इतनी संख्या में वाहन वहां तक कैसे पहुंचे? क्या रेत का खनन और परिवहन निर्धारित नियमों के अनुरूप हो रहा था? और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार कौन है? जिला खनिज अधिकारी की ओर से मामले में कार्रवाई की बात कही गई है। अब जांच और कार्रवाई के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
आने वाले दिनों में जब रेत खनन आधिकारिक रूप से शुरू होगा, तब यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि बरबसपुर घाट पर नियमों का पालन होता है या फिर रात के अंधेरे में पहले जैसी गतिविधियां दोबारा जारी रहती हैं।