Mahindra Deal: कंपनी ने ब्राजील की विमान निर्माता कंपनी Embraer SA के साथ समझौता किया है। इसके तहत महिंद्रा अपनी सहायक कंपनी नोवावायु एयरोस्पेस लिमिटेड की 51% हिस्सेदारी Embraer को बेचेगी। इस सौदे के बाद नोवावायु एयरोस्पेस में बहुमत हिस्सेदारी Embraer के पास होगी और कंपनी की मौजूदा स्वामित्व व्यवस्था में बदलाव आएगा।
महिंद्रा ग्रुप से बना रहेगा कारोबारी संबंध इस सौदे के पूरा होने के बाद नोवावायु एयरोस्पेस लिमिटेड महिंद्रा एंड महिंद्रा की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी नहीं रहेगी। इसके बजाय यह महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड (MDSL) की एसोसिएट कंपनी बन जाएगी। MDSL, महिंद्रा एंड महिंद्रा की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
मार्च 2026 में स्थापित हुई थी नोवावायु एयरोस्पेस
नोवावायु एयरोस्पेस लिमिटेड को 29 मार्च 2026 को स्थापित किया गया था। शुरुआत में यह महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी थी। अब Embraer को 51% हिस्सेदारी बेचने के समझौते के बाद कंपनी के स्वामित्व का ढांचा बदलने जा रहा है। यह घटनाक्रम महिंद्रा के एयरोस्पेस कारोबार की रणनीति में बदलाव का संकेत देता है।
1 दिसंबर 2026 तक सौदा पूरा करने की योजना
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस लेनदेन को 1 दिसंबर 2026 तक या उससे पहले पूरा करने की योजना है। फिलहाल समझौते के तहत हिस्सेदारी हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। सौदा पूरा होने के बाद नोवावायु एयरोस्पेस के शेयरधारकों की स्थिति में बदलाव आएगा और कंपनी के संचालन में दोनों समूहों की भूमिका नई व्यवस्था के अनुसार तय होगी।कंपनी ने स्पष्ट की सौदे की प्रकृति
महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी नियामकीय फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित लेनदेन संबंधित पक्षों के बीच होने वाला सौदा यानी रिलेटेड-पार्टी ट्रांजैक्शन नहीं है। कंपनी के मुताबिक, यह बिक्री स्लम्प सेल के तहत भी नहीं की जा रही है। इसके अलावा, इस प्रक्रिया में किसी तरह का विलय या अमलगमेशन शामिल नहीं है।
अब सौदे के पूरा होने पर रहेगी बाजार की नजर
Embraer के साथ यह समझौता नोवावायु एयरोस्पेस की स्वामित्व संरचना में बड़ा बदलाव लाएगा। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि तय समयसीमा के भीतर सौदा किस तरह पूरा होता है और इसके बाद दोनों कंपनियों के बीच कारोबारी सहयोग किस दिशा में आगे बढ़ता है।
नोट:- मूल सामग्री में सौदे की कीमत करीब ₹5.10 लाख बताई गई है। प्रकाशन से पहले इस राशि की पुष्टि कंपनी की नियामकीय फाइलिंग से जरूर कर लें, क्योंकि इतनी बड़ी हिस्सेदारी के सौदे में राशि की इकाई या आंकड़े में त्रुटि होने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।







