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Pooja Meri Jaan movie poster ( Image Source - Social Media )
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Pooja Meri Jaan Movie Review: एकतरफा प्यार, रिजेक्शन और समाज के दोहरे रवैये पर सवाल उठाती है, यह फिल्म

Pooja Meri Jaan Movie Review: मृणाल ठाकुर और हुमा कुरैशी की यह फिल्म एकतरफा प्यार, रिजेक्शन और महिलाओं की पसंद पर समाज की सोच को सवालों के घेरे में लाती है।

क
प्रकाशित: 03 Oct 2026, 01:40 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
मुंबई
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Pooja Meri Jaan Movie Review: लड़की की ना में भी हां होती है' या 'पीछे पड़े रहो तो एक दिन बात बन ही जाएगी'—फिल्मों से निकले ये संवाद सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं रहे, बल्कि इन्होंने हमारे समाज में एक खास तरह की सोच को बढ़ावा दिया है। अक्सर एकतरफा प्यार में पड़े लोग रिजेक्शन को स्वीकार नहीं कर पाते और जब इसका अंजाम किसी त्रासदी के रूप में सामने आता है, तो उंगली हमेशा लड़की पर ही उठती है। हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई निर्देशक नवजोत गुलाटी की फिल्म 'पूजा मेरी जान' इसी कड़वे सच और मर्दवादी मानसिकता पर सीधा प्रहार करती है।

क्या है फिल्म की कहानी ? 

कहानी घूमती है पूजा (मृणाल ठाकुर) के इर्द-गिर्द, जो एक खुशमिजाज लड़की और थिएटर आर्टिस्ट है। पूजा के साथ नाटकों में काम करने वाला अनिकेत (विक्रम सिंह चौहान) पिछले पांच सालों से उसका अच्छा दोस्त है। मंच पर दोनों भले ही आशिक-माशूका का रोल निभाते हों, लेकिन असल जिंदगी में अनिकेत इस दोस्ती को प्यार समझ बैठता है। पूजा के बार-बार मना करने के बावजूद अनिकेत उम्मीद लगाए रखता है। कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब अनिकेत शादी का प्रस्ताव रखता है और पूजा उसे खारिज कर देती है। इस रिजेक्शन को बर्दाश्त न कर पाने के कारण अनिकेत खुदकुशी कर लेता है और मरने से पहले एक वॉइस नोट छोड़ जाता है, जिसमें वह अपनी मौत की जिम्मेदार पूजा को ठहराता है। इसके बाद पूजा पर खुदकुशी के लिए उकसाने का केस दर्ज होता है और पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेती है। सोशल मीडिया और समाज बिना सच जाने पूजा को गुनाहगार मान लेते हैं। ऐसे में पूजा की दोस्त और कॉर्पोरेट वकील सना (हुमा कुरैशी) उसका केस लड़ने के लिए आगे आती है। कोर्ट में उसका सामना अनुभवी वकील जतिन (विजय राज) से होता है, जो पूजा की सोच और बर्ताव को ही इस हादसे की वजह साबित करने पर तुला है।

कहां खरी उतरती है और कहां चूकती है फिल्म ? 

कुछ साल पहले आई अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू की फिल्म 'पिंक' ने 'No Means No' के मुद्दे को मजबूती से उठाया था। 'पूजा मेरी जान' उसी बहस को आगे बढ़ाती है, लेकिन इस बार दायरा एकतरफा प्यार और दोस्ती का है। फिल्म यह सीधा सवाल पूछती है कि अगर कोई किसी का प्यार ठुकरा दे और सामने वाला कोई गलत कदम उठा ले, तो क्या उसकी जवाबदेही लड़की की है? क्या किसी महिला को अपनी पसंद तय करने या मना करने का अधिकार नहीं है? फिल्म की नीयत और सोच बिल्कुल साफ है। यह टॉक्सिक मैस्क्युलिनिटी और विक्टिम ब्लेमिंग जैसे संजीदा मुद्दों को सामने लाती है। सोशल मीडिया पर किस तरह किसी का कैरेक्टर असैसिनेशन किया जाता है, इसे फिल्म बहुत प्रभावी ढंग से दिखाती है। हालांकि, एक कोर्टरूम ड्रामा के तौर पर फिल्म थोड़ी ढीली पड़ती है।

अभिनय और निर्देशन 

कलाकारों के प्रदर्शन की बात करें तो मृणाल ठाकुर पूरी फिल्म को अपने कंधों पर संभालती हैं। उन्होंने एक बेकसूर और कटघरे में खड़ी की गई लड़की के दर्द को बहुत ही सहजता से पर्दे पर उतारा है। हुमा कुरैशी एक कॉर्पोरेट लॉयर से क्रिमिनल लॉयर बनने के सफर को अपने आत्मविश्वास और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के साथ पेश करती हैं। विजय राज अपने जाने-पहचाने अंदाज में वकील के रोल में जमते हैं, वहीं विक्रम सिंह चौहान ने भी एकतरफा प्यार में उलझे युवक के रूप में बेहतरीन काम किया है। 

फैसला 

'पूजा मेरी जान' कोई परफेक्ट कोर्टरूम ड्रामा भले न हो, लेकिन इसका विषय और सवाल बेहद जरूरी हैं। यह फिल्म साफ शब्दों में यह संदेश देती है कि जेंडर के आधार पर किसी को कटघरे में खड़ा करना गलत है और किसी के भी निजी फैसले की जिम्मेदारी किसी दूसरे पर नहीं थोपी जा सकती। अगर आप गंभीर और सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्में देखना पसंद करते हैं, तो इसे ZEE5 पर देखा जा सकता है।
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