आगामी तीज पर्व को लेकर छत्तीसगढ़ के बाजारों में रौनक तो लौटने लगी है, लेकिन खाद्य सामग्रियों के उछलते दामों ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। त्योहार के ऐन वक्त पर चीनी, चावल, दाल और खाद्य तेल की कीमतों में आई तेजी से मध्यम और गरीब परिवारों का बजट गड़बड़ा गया है।
रसोई पर पड़ रही इस अतिरिक्त मार को लेकर अब सियासत भी गरमाने लगी है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. शिवकुमार डहरिया ने बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। डहरिया ने तंज कसते हुए सवाल उठाया कि जब त्योहारों के मौके पर ही घरों से मिठास गायब हो रही है, तो सरकार के 'अच्छे दिनों' के दावों का क्या हुआ?
रसोई के बिगड़े बजट पर उठाए सवाल
डॉ. डहरिया ने कहा कि तीज छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा एक बेहद अहम त्योहार है। इस दौरान हर घर में पारंपरिक व्यंजन और मिठाइयां तैयार की जाती हैं। लेकिन चीनी, आटा, दाल और तेल के बढ़े दामों के कारण आम आदमी के लिए त्योहार मनाना भी मुश्किल हो रहा है। सरकार के विज्ञापनों और भाषणों में तो विकास की मिठास दिखती है, लेकिन जनता की थाली से राहत का स्वाद गायब है। एक तरफ सीमित आमदनी है और दूसरी तरफ बाजार में जरूरत के सामान महंगे होते जा रहे हैं।
किसान और उपभोक्ता दोनों परेशान
बाजार के मौजूदा हालात पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि खेतों में कड़ी मेहनत करने वाले किसान को उसकी उपज का सही दाम मिलने में संघर्ष करना पड़ता है, जबकि वही अनाज जब बाजार में उपभोक्ता तक पहुंचता है तो उसकी कीमतें आसमान छूने लगती हैं। डहरिया के मुताबिक, सरकार केवल महंगाई के आंकड़े और तर्क देने में व्यस्त है, जबकि उसे जमीनी स्तर पर जनता को राहत देने के उपाय करने चाहिए।
कांग्रेस नेता ने मांग की है कि:
- बाजार में जरूरी खाद्य वस्तुओं की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखी जाए।
- कीमतों को नियंत्रित करने के लिए नियमित मॉनिटरिंग सेल सक्रिय हो।
- त्योहार के दौरान अनुचित लाभ उठाने वाले मुनाफाखोरों पर तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय साथ मिलकर काम करने की अपील की, ताकि आने वाले पर्व आम जनता के लिए आर्थिक बोझ बनने के बजाय खुशियों का जरिया बन सकें।
कालाबाजारी रोकने और निगरानी की मांग
त्योहारों के दौरान जमाखोरी और कालाबाजारी की आशंका जताते हुए उन्होंने प्रशासन से सख्त रुख अपनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मांग बढ़ते ही कई बार मनमाने दाम वसूले जाते हैं, जिस पर रोक लगाना सरकार की जिम्मेदारी है।