संगठन को धार देने के लिए चार खास समितियां
सपा के साथ गठबंधन और सीटों का पेंच
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच 2027 के चुनाव में भी गठबंधन की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन असली परीक्षा सीटों के बंटवारे को लेकर होनी है।
कांग्रेस का दावा: पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस इस बार उत्तर प्रदेश में 125 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा पेश कर सकती है। इसके पीछे मुख्य तर्क 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के सुधरे हुए प्रदर्शन और कई विधानसभा क्षेत्रों में मिली बढ़त को माना जा रहा है।
सपा का रुख: दूसरी तरफ, अखिलेश यादव की कोशिश यही होगी कि समाजवादी पार्टी अधिकतम सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे।
चूंकि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी सीट शेयरिंग को लेकर कुछ पेचीदगियां आई थीं, जिन्हें सुलझाने में प्रियंका गांधी ने पर्दे के पीछे अहम भूमिका निभाई थी, इसलिए इस बार भी अखिलेश यादव के साथ सीधी बातचीत की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर आने की पूरी संभावना है।
रैलियों का दौर और बीजेपी की पैनी नजर
चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के लिए कांग्रेस राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी रैलियां करने की योजना बना रही है, जिसमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों के शामिल होने के आसार हैं। हालांकि, इस पूरे सियासी समीकरण पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की भी पैनी नजर है। बीजेपी इस बात पर नजर गड़ाए बैठी है कि कांग्रेस और सपा के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान किस दिशा में जाती है, ताकि ऐन वक्त पर इसे चुनावी मुद्दा बनाकर जनता के बीच भुनाया जा सके। कुल मिलाकर, यूपी का यह राजनीतिक दंगल अभी से काफी दिलचस्प मोड़ लेता दिख रहा है, जहां प्रियंका और अखिलेश की टेबल टॉक ही तय करेगी कि विपक्षी गठबंधन कितनी मजबूती के साथ मैदान में उतरता है।






