"मनोरंजन" के लिए 161 परिणाम मिले
मनोरंजन
डकैत की ओटीटी रिलीज : आदिवी शेष और मृणाल ठाकुर स्टारर फिल्म अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध
अभिनेता आदिवी शेष और अभिनेत्री मृणाल ठाकुर की फिल्म “डकैत” अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज । थिएटर में रिलीज के बाद अब यह फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों के लिए उपलब्ध है, जिससे इसे व्यापक और वैश्विक दर्शक वर्ग तक पहुंच मिल रही है। फिल्म के ओटीटी रिलीज के बाद दर्शकों में उत्साह देखा जा रहा है, खासकर उन लोगों में जो इसे सिनेमाघरों में नहीं देख पाए थे। अब दर्शक इसे घर बैठे आसानी से देख सकते हैं और कलाकारों के अभिनय का आनंद ले सकते हैं।
इको पार्क : वेस्ट टू बेस्ट का जीवंत उदाहरण, कबाड़ से कमाल तक की प्रेरक कहानी
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के दुलदुला जनपद पंचायत में विकसित इको पार्क “वेस्ट टू बेस्ट” की अवधारणा का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहाँ पुराने टायरों, लोहे के कबाड़ और अन्य अनुपयोगी सामग्रियों से आकर्षक कलाकृतियाँ, झूले और सजावटी संरचनाएँ बनाई गई हैं। यह पार्क केवल सौंदर्य का केंद्र नहीं, बल्कि एक सामुदायिक स्थल भी है जहाँ ओपन जिम, बच्चों के खेल क्षेत्र और मनोरंजन की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। जिला प्रशासन ने इसके पर्यावरणीय महत्व को देखते हुए पौधरोपण और नियमित देखभाल के निर्देश दिए हैं। यह इको पार्क स्वच्छता, पुनर्चक्रण और रचनात्मकता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है और अन्य क्षेत्रों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करता है।
ग्लैमर
गवर्नर का टीजर वायरल : आर्थिक तबाही के साथ खौफनाक कहानी लेकर आए मनोज बाजपेयी
गवर्नर का टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। फिल्म में देश के सबसे बड़े आर्थिक संकट, भ्रष्टाचार और सत्ता संघर्ष की कहानी दिखाई गई है। मनोज बाजपेयी एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी के किरदार में नजर आ रहे हैं, जो देश को आर्थिक तबाही से बचाने की कोशिश करता है। दमदार संवाद, डार्क विजुअल्स और थ्रिलर अंदाज ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। यह पॉलिटिकल-इकोनॉमिक ड्रामा 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
अन्य
द्रविड़ पॉलिटिक्स 2.0: साउथ कनेक्शन का नया अध्याय या राष्ट्रीय राजनीति की नई धुरी
तमिलनाडु में थलपति विजय की राजनीतिक एंट्री केवल क्षेत्रीय घटना नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में साउथ कनेक्शन के नए उभार का संकेत है। उनकी द्रविड़ पॉलिटिक्स 2.0 पारंपरिक द्रविड़ विचारधारा जिसकी जड़ें ईवी रामासामी पेरियार के सामाजिक न्याय आंदोलन में हैं, उनको आधुनिक और संतुलित रूप में प्रस्तुत करती है।
ग्लैमर
भूत बंगला के बाद अब पर OTT राकासा का आतंक, एपेक्स को पछाड़ बनी नंबर 1 फिल्म
फिल्म “राकासा” एक हॉरर-कॉमेडी है जो पहले सिनेमाघरों में सफल रही और अब Netflix पर रिलीज़ होकर और भी लोकप्रिय हो गई है। ओटीटी पर इसने तेजी से दर्शकों का ध्यान खींचते हुए टॉप ट्रेंडिंग फिल्म का स्थान हासिल किया है। कहानी एक प्राचीन श्राप और “ब्रह्म राक्षस” के जागने के इर्द-गिर्द घूमती है। नायक वीरू अपनी प्रेमिका के साथ गांव लौटता है, लेकिन उसकी एक गलती से एक खतरनाक दैवीय शक्ति मुक्त हो जाती है। इसके बाद वह अपने परिवार और गांव को बचाने के लिए संघर्ष करता है।
देश
आखिरी सांस तक साथ : बरगी की लहरों में डूबी मां और मासूम की तस्वीर भले फेक हो, लेकिन व्यवस्था की खामोशी है बेहद असली
बरगी डैम की यह त्रासदी उन परिवारों का व्यक्तिगत नुकसान नहीं है। यह एक सार्वजनिक चेतावनी है कि पर्यटन, मनोरंजन और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच सुरक्षा को कभी भी द्वितीयक नहीं माना जा सकता। और जब तक उन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक यह मान लेना चाहिए कि बरगी की लहरों में नौ जिंदगी के साथ हमारी चुप्पी भी डूबी हुई है।
मनोरंजन
बॉक्स ऑफिस पर धमाल : भूत बंगला ने 12 दिनों में ₹121 करोड़ के पार, ‘स्त्री’ का रिकॉर्ड तोड़ने के करीब
अक्षय कुमार की हॉरर-कॉमेडी फिल्म भूत बंगला बॉक्स ऑफिस पर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है। 12वें दिन फिल्म ने करीब ₹4.50 करोड़ कमाए, जिससे 12 दिनों में इसका कुल कलेक्शन लगभग ₹121 करोड़ पहुंच गया। पहले हफ्ते में फिल्म ने ₹84.60 करोड़ कमाए थे और दूसरे हफ्ते में भी इसकी कमाई स्थिर बनी हुई है। फिल्म ने मुंज्या का लाइफटाइम कलेक्शन पार कर लिया है और अब स्त्री के रिकॉर्ड (₹129.67 करोड़) के करीब पहुंच गई है। मजबूत स्टारकास्ट, कॉमेडी-हॉरर का मिश्रण और दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया इसकी सफलता की वजह मानी जा रही है।
ग्लैमर
ट्रेलर रिलीज : ममूटी-मोहनलाल की जोड़ी ने मचाया धमाल, साइबर थ्रिलर ने सोशल मीडिया पर बढ़ाई हलचल
पैट्रियट 2026” के हिंदी ट्रेलर में एक हाई-टेक साइबर-थ्रिलर कहानी दिखाई गई है, जिसमें सरकार द्वारा बनाया गया डेटा-ट्रैकिंग ऐप धीरे-धीरे दुरुपयोग का माध्यम बन जाता है। ममूटी एक ऐसे डॉक्टर की भूमिका में हैं जो किसी बड़ी साजिश में फंस जाते हैं, जबकि मोहनलाल उनके पुराने दोस्त के रूप में कहानी में आते हैं, जिससे दोनों के बीच विचारधारा और परिस्थितियों का टकराव होता है।
धर्म
प्रेमानंद महाराज : समय की नहीं, मन की कमी है-नामजप से बदल सकता है जीवन
वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज ने सत्संग में कहा कि नामजप और भक्ति के लिए समय की कमी नहीं, बल्कि मन और प्राथमिकताओं की समस्या होती है। उन्होंने बताया कि लोग मनोरंजन और मोबाइल के लिए समय निकाल लेते हैं, लेकिन भक्ति को टालते हैं। उनके अनुसार, यदि दिनचर्या में नियमित रूप से नामजप किया जाए तो मन को शांति मिलती है, नकारात्मक विचार कम होते हैं और जीवन में सकारात्मकता, संतुलन तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
छत्तीसगढ़
कम उम्र में बड़ा मुकाम : छत्तीसगढ़ के युवा फिल्मकार एस अंशु धुरंधर की राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय पहचान
छत्तीसगढ़ के युवा फिल्मकार एस अंशु धुरंधर ने कम उम्र में फिल्म और साहित्य दोनों क्षेत्रों में राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। उनकी फिल्मों और पुस्तकों में सामाजिक, ऐतिहासिक और प्रेरक विषयों को प्रमुखता दी गई है। अब तक उनकी फिल्मों का चयन 20 से अधिक फिल्म महोत्सवों में हो चुका है और उन्हें 10 से ज्यादा पुरस्कार मिल चुके हैं। वर्तमान में वे नई फिल्मों और पुस्तकों पर काम कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य युवाओं को सकारात्मक दिशा देना है।
कीर्तिमान अतिथि
डिजिटल युग : बदलते दौर में शिक्षा का नया आधार बना सोशल मीडिया, एआई से सशक्त हो रहे छात्र
सोशल मीडिया और एआई ने शिक्षा को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बना दिया है। छोटे शहरों के छात्रों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है, जिससे वे बड़े शहरों के छात्रों के समान संसाधनों का लाभ उठाकर अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। सांई कोचिंग के डायरेक्टर द्वय डॉ. रंजना दुबे और लव दुबे दोनों का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में इस डिजिटल परिवर्तन को अपनाना समय की मांग है। यदि छात्र और अभिभावक इन आधुनिक साधनों का सही उपयोग करें, तो निश्चित रूप से बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
छत्तीसगढ़
अक्ति पर्व पर गांवों में रचा बच्चों का पुतला-पुतली विवाह, सांस्कृतिक रंगों से सराबोर हुआ ग्रामीण अंचल
अक्षय तृतीया (अक्ति पर्व) के अवसर पर गांवों में बच्चों द्वारा पुतला-पुतली की प्रतीकात्मक शादी की परंपरा निभाई गई। बच्चे गुड्डे-गुड़ियों को दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाकर बारात, हल्दी, फेरे और विदाई जैसी रस्में पूरी करते हैं। ढोलक-थाली के साथ निकली इस बारात में पूरा गांव शामिल होता है और बड़े-बुजुर्ग भी उत्साह बढ़ाते हैं। यह परंपरा ग्रामीण संस्कृति, सादगी और सामाजिक जुड़ाव को दर्शाती है, साथ ही नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने का माध्यम भी बनती है।