"दूषित पानी" के लिए 25 परिणाम मिले
नारायणपुर
अंजरेल गांव में लाल पानी का कहर, खेतों में भरा जहरीला पानी और फसल बर्बाद
नारायणपुर के अंजरेल गांव में रावघाट खदान क्षेत्र से बहकर आए लाल पानी ने किसानों की फसलें बर्बाद कर दी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खेतों में दूषित पानी भरने से खेती प्रभावित हुई है और पेयजल संकट भी बना हुआ है। प्रशासन ने सर्वे कर आरबीसी के तहत मुआवजा देने और पेयजल समस्या दूर करने का आश्वासन दिया है।
राष्ट्रीय
पेयजल व्यवस्था पर सवाल : राजधानी भोपाल में पीने के पानी की पोल खुली, 63 में से 43 सैंपलों में बैक्टीरिया
भोपाल में पेयजल की गुणवत्ता पर हुई जांच में बड़े तालाब से सप्लाई होने वाले करीब 90% पानी के नमूने दूषित पाए गए। वहीं कोलार जल स्रोत के कुछ सैंपलों में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिला, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। सामाजिक संगठनों ने नगर निगम की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
महासमुंद
सुशासन तिहार में उठी मांग पर कार्रवाई, बागबाहरा के तालाबों को बचाने एसटीपी निर्माण की तैयारी शुरू
बागबाहरा में नगर के तालाबों को नालियों के गंदे पानी से बचाने की दिशा में नगर पालिका ने दो एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ब्लॉक कांग्रेस महामंत्री मयंक शर्मा द्वारा सुशासन तिहार 2026 में उठाई गई मांग के बाद यह पहल की गई है। परियोजना पूरी होने पर तालाबों में गंदे पानी का प्रवाह रुकेगा और पर्यावरण व जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
छत्तीसगढ़
अछोली शराब फैक्ट्री के खिलाफ ग्रामीणों का हल्ला बोल : बारिश में भी धरने पर डटे, बच्चों के भीगने से बढ़ा आक्रोश
महासमुंद के अछोली गांव में पिकाडली शराब फैक्ट्री के खिलाफ ग्रामीणों ने सड़क, प्रदूषण, रोजगार और शिक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क सुधार का पांच दिन का वादा पूरा नहीं हुआ। तेज बारिश के दौरान स्कूली बच्चों को फैक्ट्री परिसर में शरण नहीं मिलने से लोगों का आक्रोश और बढ़ गया। प्रशासन ने 10 घंटे में अस्थायी सड़क सुधार का आश्वासन दिया, लेकिन ग्रामीण पक्की सड़क और स्थायी समाधान की मांग पर अड़े रहे।
सेहत
मानसून : सर्दी-जुकाम से बचने के 5 आसान उपाय, छोटी-छोटी आदतें रखेंगी बीमारियों से दूर
मानसून के मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार जैसी मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इनसे बचने के लिए बारिश में भीगने से बचें, साफ पानी का सेवन करें, विटामिन-C से भरपूर चीजें खाएं, गर्म खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करें और शरीर व कपड़ों को सूखा रखें।
सेहत
मौसम का डबल अटैक : अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़, डॉक्टर बोले-खान-पान में लापरवाही पड़ेगी भारी
देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और उमस का असर लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है। अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीजों की संख्या 30-40 फीसदी तक बढ़ गई है। डॉक्टरों के अनुसार पेट संक्रमण, फूड पॉइजनिंग, मलेरिया, डेंगू, वायरल फीवर, हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।
जुर्माना : पर्यावरण को नुकसान पड़ा भारी, हसदेव ताप विद्युत गृह प्रबंधन पर 27.60 लाख का दंड
कोरबा के हसदेव ताप विद्युत गृह (पूर्व) के ऐश डाइक में दरार आने से राखयुक्त पानी आसपास के क्षेत्रों और जल स्रोतों में फैल गया, जिससे गंभीर जल प्रदूषण की स्थिति उत्पन्न हुई। मामले की जांच के बाद छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सीएसपीजीसीएल पर 27.60 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई है। मंडल ने इसे पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आवश्यक कार्रवाई बताया है।
सेहत
हेल्थ अलर्ट : भीषण गर्मी और उमस के बीच बढ़ा बीमारियों का खतरा, जानें खुद को सुरक्षित रखने के अचूक उपाय
देश के कई हिस्सों में इस समय मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है—एक तरफ भीषण गर्मी और उमस, तो दूसरी तरफ प्री-मानसून बारिश। इस अचानक बदलाव का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है और अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। डॉक्टरों के अनुसार इस मौसम में सबसे ज्यादा खतरा डिहाइड्रेशन, हीट इंजरी, पेट के संक्रमण (फूड पॉइजनिंग, डायरिया), वायरल फीवर और त्वचा-आंखों के इंफेक्शन का है।
सेहत
शिगेला बैक्टीरिया : बना खतरा, केरल में मासूम की मौत के बाद बढ़ी चिंता
केरल में चार वर्षीय बच्चे की शिगेला संक्रमण से मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। शिगेला एक अत्यंत संक्रामक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो दूषित भोजन, पानी और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलता है। यह विशेष रूप से बच्चों के लिए खतरनाक माना जाता है और गंभीर दस्त, बुखार तथा डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वच्छता और समय पर इलाज ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
राष्ट्रीय
दावों की खुली पोल : मुरैना के आदिवासी गांवों में बूंद-बूंद को तरस रहे लोग, 45°C की तपिश में घड़ा ढो रही हैं महिलाएं
मुरैना के बहेरी समेत आसपास के पांच गांवों में जल संकट गंभीर रूप ले चुका है। गर्मी और मानसून दोनों मौसमों में ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। कई बार उन्हें गंदे गड्ढों और नालों का पानी पीने को मजबूर होना पड़ता है, जिससे डायरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियां फैल रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
अंबिकापुर (सरगुजा)
संघर्ष : मैनपाट में आदिवासी परिवार दूषित जल पीने को मजबूर, बीमारियों का खतरा बढ़ा
सरगुजा जिले के मैनपाट स्थित कुनिया ग्राम पंचायत के जंगल पारा में गंभीर पेयजल संकट बना हुआ है। ग्रामीणों को साफ पानी नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते वे मजबूरी में नाले के किनारे बने अस्थायी जल स्रोत का दूषित पानी पी रहे हैं। महिलाएं 20 फीट गहरी खाई उतरकर पानी लाने को मजबूर हैं और कई बार अंधेरे में भी पानी भरने जाती हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है।
छत्तीसगढ़
भिलाई में पीलिया : सेक्टर 07 में 25 बच्चों में मिला संक्रमण, दो की हालत गंभीर, 110 परिवार के सर्वे में 15 नए मरीज
भिलाई के सेक्टर-7 में पीलिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। अब तक 25 से ज्यादा बच्चे संक्रमित हो चुके हैं, जबकि हाल ही में 15 नए मरीज मिले हैं। दो बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने 110 घरों का सर्वे कर पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। प्राथमिक जांच में दूषित पानी को संक्रमण की वजह माना जा रहा है।