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राष्ट्रीय
बंद ICU से बढ़ा संकट : स्टाफ नहीं, मरीजों को 70 किमी दूर इलाज की मजबूरी
मध्य प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे लगातार किए जाते हैं, लेकिन कटनी जिले की बहोरीबंद विधानसभा की तस्वीर इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। यहां करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया आधुनिक आईसीयू पिछले करीब एक साल से बंद पड़ा है। कारण सिर्फ इतना है कि इसे चलाने के लिए डॉक्टर, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और टेक्नीशियन की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है।
राज्य सरकार
डिजिटल मिशन : डिजिटल हेल्थ आईडी से आसान होगा इलाज, मिशन को मिली नई गति
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत महासमुंद जिले का चयन मॉडल जिला के रूप में किया गया है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला पंचायत सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें मिशन के उद्देश्यों, प्रावधानों और कार्ययोजना की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल हेल्थ सिस्टम से मरीजों, अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा उपचार प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन दर्ज की जाएगी।
रायगढ़
हादसा : कोयला रूट पर ट्रेन से टकराई 45 साल की मादा हथिनी, इलाज से पहले तोड़ा दम
तेज रफ्तार का शिकार: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चारमार गांव में यह दर्दनाक हादसा हुआ। कोयला परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली रेल लाइन पर रात के अंधेरे में एक तेज रफ्तार मालगाड़ी ने पटरी पार कर रही लगभग 45 वर्षीय जंगली मादा हथिनी को सीधी टक्कर मार दी।
सेहत
जीन थेरेपी : बदलेगी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज
वैज्ञानिकों ने निष्क्रिय वायरस की मदद से विशेष जीनों को रीढ़ की हड्डी तक पहुंचाकर स्पास्टिसिटी के इलाज में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। प्रारंभिक शोध में यह तकनीक मांसपेशियों की कठोरता और ऐंठन को कम करने में प्रभावी दिखाई दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह जीन थेरेपी स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, स्ट्रोक, मल्टीपल स्क्लेरोसिस और अन्य न्यूरोलॉजिकल रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकती है।
बिलासपुर
आरोप : इलाज के दौरान पुलिस जवान की मौत, जांच कमेटी गठित
बिलासपुर के सरकंडा थाना में पदस्थ पुलिस जवान सत्य कुमार पाटले की श्रीराम अस्पताल में पथरी के इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। अब मृतक के पिता ने कलेक्टर को पत्र लिखकर 1 करोड़ रुपए मुआवजा, अस्पताल के खिलाफ एफआईआर और परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की है।
रायपुर
निःशुल्क इलाज : चिरायु योजना से स्वस्थ बच्चों ने जताया आभार
सुशासन तिहार के दौरान बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के करहीबाजार में चिरायु योजना से लाभान्वित दो बच्चों ने मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai से मुलाकात कर उन्हें धन्यवाद कार्ड भेंट किया।दोनों बच्चों का इलाज और ऑपरेशन सरकारी योजना के तहत निःशुल्क हुआ, जिससे उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिली और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ।मुख्यमंत्री ने बच्चों से संवाद कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि सरकार का उद्देश्य हर जरूरतमंद तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है।
रायपुर
नई क्रांति : बालको मेडिकल सेंटर ने रोबोटिक सर्जरी और एकीकृत ऑन्कोलॉजी से बदली इलाज की तस्वीर
मध्य भारत में कैंसर उपचार को लेकर लंबे समय से मौजूद चुनौतियों को अब आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से काफी हद तक कम किया जा रहा है। BALCO Medical Centre ने क्षेत्र में एकीकृत ऑन्कोलॉजी मॉडल विकसित कर मरीजों को एक ही स्थान पर मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन कैंसर उपचार उपलब्ध कराया है। पिछले आठ वर्षों में अस्पताल ने हजारों मरीजों का इलाज किया है, बड़ी संख्या में सर्जरी की हैं और कैंसर की शुरुआती पहचान को भी बढ़ावा दिया है। हाल ही में रोबोटिक सर्जरी सिस्टम और आधुनिक ऑपरेशन थिएटर की शुरुआत से जटिल कैंसर ऑपरेशन अधिक सुरक्षित, सटीक और कम दर्द वाले हो गए हैं।
रायपुर संभाग
मानवता की मिसाल : विधायक रोहित साहू ने मासूम युवराज को दिलाया बेहतर इलाज
गरियाबंद जिले के बेहराडीह गांव निवासी विशेष पिछड़ी कमार जनजाति के तीन वर्षीय मासूम युवराज नेताम जन्मजात गंभीर बीमारी एनोरेक्टल मालफॉर्मेशन से पीड़ित है। आर्थिक तंगी के कारण परिवार पिछले तीन वर्षों से इलाज के लिए भटक रहा था। मामला सामने आने पर राजिम विधायक रोहित साहू ने तत्काल पहल करते हुए बच्चे को रायपुर के डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया।
देश
बदहाल व्यवस्था : स्वास्थ्य केंद्र पर फिर उठे सवाल, इलाज से ज्यादा अव्यवस्थाओं से जूझ रहे मरीज
छतरपुर जिले के बक्सवाहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्थाओं और मरीजों से कथित वसूली के आरोपों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 39 पंचायतों के लोगों के लिए प्रमुख सरकारी अस्पताल माने जाने वाले इस केंद्र में मरीजों को दवा, सलाइन और अन्य जरूरी सामान के लिए बाहर भटकना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने सलाइन चढ़ाने के नाम पर पैसे वसूले जाने का आरोप लगाया है। वहीं भीषण गर्मी में साफ पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर भी नाराजगी है। मामले पर बीएमओ डॉ. सत्यम असाटी ने शिकायत मिलने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
कोरबा
घंटों इंतजार : ड्रेसिंग रूम में स्टाफ नहीं, दोस्त ने किया मरीज का इलाज
जिले के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के रामपुर निवासी एक मरीज हुकुम कुमार, जिनका हाल ही में पथरी का ऑपरेशन हुआ था, ड्रेसिंग कराने के लिए अपने मित्र चंदन कुमार के साथ अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टर से सलाह मिलने के बाद जब वे ड्रेसिंग रूम पहुंचे तो मरीज के अनुसार वहां काफी देर तक कोई स्टाफ मौजूद नहीं था। दर्द बढ़ने और मदद न मिलने की स्थिति में उनके मित्र ने ड्रेसिंग रूम में उपलब्ध सामग्री से खुद ही घाव की ड्रेसिंग कर दी। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सह अधीक्षक ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही है।
सेहत
बेड का संकट : रायपुर एम्स में गंभीर मरीजों को भी नहीं मिल रही जगह, रेफर के भरोसे इलाज
AIIMS Raipur में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव है। रोज़ हजारों मरीज OPD और इमरजेंसी में पहुंच रहे हैं, जबकि 1000 बेड क्षमता कम पड़ रही है। नतीजतन कई गंभीर मरीजों को भी बेड न मिलने पर अन्य अस्पतालों जैसे Dr. Bhimrao Ambedkar Memorial Hospital में रेफर किया जा रहा है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और कई बार समय पर इलाज न मिलने से स्थिति गंभीर हो जाती है। MRI, CT स्कैन जैसी जांचों के लिए लंबी कतारें और रिपोर्ट में देरी भी इलाज को प्रभावित कर रही हैं, जिससे मरीजों को निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है और खर्च बढ़ रहा है।
छत्तीसगढ़ के दुर्गम वनांचलों में मोबाइल मेडिकल यूनिट बनी वरदान, 3.5 महीनों में 2035 ग्रामीणों को मिला घर के पास इलाज
छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत 15 जनवरी 2026 से शुरू हुई इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में लगभग 2035 लोगों को उनके ही गांवों में निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इस चलते-फिरते अस्पताल में डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन और नर्स की टीम बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी जांचें मौके पर ही करती है और मुफ्त दवाइयां भी देती है। पहले जहां ग्रामीणों को इलाज के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, अब उन्हें गांव में ही सुविधा मिल रही है।