"शिक्षक" के लिए 586 परिणाम मिले
संरक्षण पर फोकस : खनन प्रभावित क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और स्थायी आजीविका सृजन की दिशा में बड़ा कदम
कोरबा में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) शासी परिषद की बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर कुणाल दुदावत ने की, जबकि मुख्य उपस्थिति मंत्री लखनलाल देवांगन, सांसद ज्योत्सना महंत और अन्य जनप्रतिनिधियों की रही। बैठक में बताया गया कि डीएमएफ कोरबा जिले के विकास का प्रमुख आधार बन चुका है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अधोसंरचना जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कार्य हो रहे हैं। मंत्री ने सभी कार्यों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी तरीके से पूरा करने पर जोर दिया।
सफलता के लिए मेहनत : विद्यार्थियों की भविष्य की आकांक्षाओं पर मुख्यमंत्री की सराहना
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में कक्षा 10वीं और 12वीं की प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों से मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनके सपनों, पढ़ाई की दिनचर्या और भविष्य की योजनाओं के बारे में जाना तथा उन्हें मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है और सफलता के लिए नियमित अभ्यास, समय प्रबंधन और स्वस्थ जीवनशैली बेहद जरूरी हैं। उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों को साझा करते हुए बताया कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और समर्पण से आगे बढ़कर सफलता हासिल की जा सकती है।
रायपुर
आंदोलन की चेतावनी : 8 प्राचार्यों के निलंबन पर प्राचार्य फेडरेशन नाराज
बालोद जिले में परीक्षा परिणाम के आधार पर 8 प्राचार्यों के निलंबन के खिलाफ छत्तीसगढ़ प्राचार्य फेडरेशन ने रायपुर में आपात बैठक की। फेडरेशन ने कार्रवाई को एकतरफा और नियमों के खिलाफ बताते हुए निलंबन आदेश वापस लेने की मांग की। संगठन ने कहा कि कमजोर परीक्षा परिणाम के लिए केवल प्राचार्यों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। साथ ही चेतावनी दी गई कि आदेश वापस नहीं होने पर प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
शिक्षा
बड़ा बदलाव : किताबी ज्ञान के साथ अब हुनर की बारी, स्कूलों में बदली शिक्षा की तस्वीर
जिले के सरकारी स्कूलों में नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों को अब केवल किताबी शिक्षा नहीं, बल्कि व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को ऑटोमोबाइल, कंप्यूटर और इलेक्ट्रिकल जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक कौशल सिखाया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर या स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए तैयार करना है। स्कूलों में वर्कशॉप और विशेषज्ञों के माध्यम से प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है।
महासमुंद
समीक्षा बैठक : 839 दिव्यांग बच्चों को योजनाओं से जोड़ने पर जोर, शिक्षा एवं समाज कल्याण विभाग की बैठक
बागबाहरा ब्लॉक में शिक्षा और समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि क्षेत्र में लगभग 839 दिव्यांग बच्चे हैं, जिनके सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए गए। जनपद उपाध्यक्ष श्री तरुण व्यवहार ने दिव्यांग बच्चों को पेंशन और अन्य लाभ समय पर दिलाने पर जोर दिया तथा जिनके प्रमाण पत्र नहीं बने हैं उनका चिन्हांकन करने को कहा।
प्रेरणादायी आयोजन : मदर्स डे पर पृथ्वीम फाउंडेशन ने मातृशक्तियों का किया सम्मान, कुमुदिनी शर्मा व टेमिन हिरवानी को मिला विशेष सम्मान
नवापारा नगर में मदर्स डे के अवसर पर पृथ्वीम फाउंडेशन ने कुमुदिनी शर्मा और टेमिन हिरवानी जैसी मातृशक्तियों का सम्मान किया। दोनों माताओं को उनके संघर्ष, त्याग और बच्चों के सफल भविष्य निर्माण में योगदान के लिए शाल व श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। कुमुदिनी शर्मा के बच्चे विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठित पदों पर कार्यरत हैं, जबकि टेमिन हिरवानी ने कठिन परिस्थितियों में अपने पुत्र को उच्च शिक्षा दिलाकर सफल बनाया।
ग्रामीण महिलाओं की नई उड़ान : इलेक्ट्रिशियन प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
बिलासपुर के कोनी स्थित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आर-सेटी) में ग्रामीण महिलाओं को पहली बार इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण दिया गया है। ‘बिहान’ योजना से जुड़ी 20 महिलाएं इस प्रशिक्षण के माध्यम से पुरुष-प्रधान माने जाने वाले तकनीकी क्षेत्र में कदम रखकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। प्रशिक्षण में उन्हें वायरिंग, घरेलू विद्युत उपकरणों की मरम्मत, सुरक्षा उपाय और तकनीकी ज्ञान सिखाया गया।
देश
मदर्स डे : मातृत्व के सम्मान, त्याग और प्रेम को समर्पित वैश्विक उत्सव
मदर्स डे माताओं के निःस्वार्थ प्रेम, त्याग और समर्पण के सम्मान को समर्पित है।मातृ दिवस हर साल मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है, जिसमें स्कूलों, परिवारों और समाज में विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए माताओं के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है।यह दिन हमें याद दिलाता है कि माँ जीवन की पहली गुरु होती है और उसका प्यार और योगदान जीवनभर अमूल्य रहता है।
शिक्षा
बरोण्डा स्कूल का शानदार रिजल्ट : 12वीं में 88.89% और 10वीं में 76.92% परिणाम, पायल और साधना बनीं टॉपर
जांजगीर-चांपा
प्रश्नपत्र वायरल : एआई से नकल का बड़ा खुलासा, डी-फार्मेसी परीक्षा में 500 से ज्यादा छात्र घेरे में
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) से संबद्ध चार कॉलेजों में डी. फार्मेसी परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर नकल का मामला सामने आया है। जांच में 500 से अधिक छात्रों की संलिप्तता सामने आई। आरोप है कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र और उत्तर व्हाट्सएप पर वायरल हो गए थे। कई छात्र मोबाइल और एआई ऐप्स की मदद से उत्तर लिखते पाए गए। जांच के दौरान कुछ कॉलेजों में नकल सामग्री बरामद हुई, जबकि एक शिक्षक के मोबाइल में उत्तरों की सॉफ्ट कॉपी भी मिली। कुछ कॉलेज प्रशासन पर जांच में सहयोग नहीं करने के आरोप लगे हैं।
बलरामपुर-रामानुजगंज
शिक्षा विभाग में हड़कंप : फर्जी नाम से सरकारी नौकरी कर रहा था प्रधान पाठक, जांच में खुलासा होते ही निलंबित
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक प्रधान पाठक पर फर्जी नाम और दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप लगा है। ग्राम पंचायत कुशफर के निवासी सत्यनारायण की शिकायत पर जिला प्रशासन ने मामले की जांच कराई। जांच में पता चला कि शिक्षक का असली नाम रामदुलार पिता जीतू है, जबकि उसने लालमन सिंह पिता रामवृक्ष के नाम से नौकरी प्राप्त की थी। मामले को गंभीर मानते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने आरोपी प्रधान पाठक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। फिलहाल विभागीय जांच जारी है।
शिक्षा
साइबर सिक्योरिटी : 9वीं से 12वीं तक की क्लास के बच्चों के लिए परीक्षा अनिवार्य
सरकार स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल सुरक्षा की ट्रेनिंग देने जा रही है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव और ऑनलाइन गेमिंग की लत से बचाना है। शुरुआत में 500 स्कूलों में यह कार्यक्रम लागू होगा, जहां स्मार्ट टीवी और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। छात्रों को सालभर में लगभग 40 घंटे की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें फिशिंग, फेक ऐप, सोशल मीडिया प्राइवेसी और साइबर अपराध से बचाव की जानकारी शामिल होगी। इस अभियान में साइबर पुलिस भी सहयोग करेगी और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कोर्स के अंत में परीक्षा भी होगी, लेकिन उसके अंक मुख्य परीक्षा में नहीं जोड़े जाएंगे।