"ग्रामीण अर्थव्यवस्था" के लिए 109 परिणाम मिले
बगिया एम-कैड सिंचाई परियोजना का शुभारंभ, जशपुर बनेगा आधुनिक कृषि मॉडल जिला
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के बगिया गांव में एम-कैड योजना के तहत दाबित उद्वहन सिंचाई परियोजना का शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य आधुनिक पाइप आधारित सिंचाई प्रणाली के माध्यम से जल की बचत, बेहतर उपयोग और किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।
यात्रा
काले हिरणों की वापसी : छत्तीसगढ़ बना वन्यजीव पुनरुद्धार का नया उदाहरण
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में काले हिरणों (ब्लैकबक) का सफल पुनरुद्धार किया गया है। 1970 के दशक में विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति को 2018 से शुरू हुई वैज्ञानिक योजना और 2026 तक चले संरक्षण प्रयासों के बाद फिर से स्थापित किया गया, जिसकी संख्या अब लगभग 200 तक पहुँच गई है। फरवरी 2026 में 30 काले हिरणों को “सॉफ्ट रिलीज” तकनीक से प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया।
सिल्क समग्र 2 योजना से रेशम उत्पादन को बढ़ावा, 21 किसानों को मिला लाभ
महासमुंद जिले में केंद्र प्रायोजित सिल्क समग्र 2 योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। योजना के तहत अब तक 21 किसानों का चयन कर शहतूत पौधरोपण कराया गया है। यह योजना 5 एकड़ से कम भूमि वाले छोटे एवं सीमांत किसानों को रेशम उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय का अवसर देती है, जिसमें प्रति वर्ष लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये तक की शुद्ध आय संभव है। किसानों को पौधरोपण, सिंचाई, कृमि पालन गृह निर्माण और उपकरणों के लिए कुल 5 लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी शामिल है।
शिक्षा का नया रूप : छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी केंद्र बने ‘पहली पाठशाला’ के सशक्त उदाहरण
छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में आंगनबाड़ी केंद्र अब पारंपरिक पोषण केंद्रों से आगे बढ़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण रोजगार के समन्वित मॉडल के रूप में विकसित हो रहे हैं। ‘बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड (BALA)’ पहल के तहत बनाए गए आधुनिक भवनों में दीवारों, फर्श और सीढ़ियों को शिक्षण सामग्री में बदल दिया गया है, जिससे बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं। मनरेगा के माध्यम से इन केंद्रों के निर्माण ने ग्रामीणों को रोजगार भी दिया है, जिससे आर्थिक सशक्तिकरण और पलायन में कमी आई है।
छत्तीसगढ़
गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करने की उठी माँग: संविधान संशोधन के लिए महासमुंद में गौसेवकों ने सौंपा ज्ञापन
भारत के संविधान में पहले से ही अनुच्छेद 48 के तहत राज्य को गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन यह नीतिनिर्देशक तत्व (Directive Principle) है, यानी यह अदालत में बाध्यकारी नहीं होता। इसी तरह अनुच्छेद 51A नागरिकों के कर्तव्यों की बात करता है, लेकिन इन्हें लागू करवाने के लिए दंडात्मक प्रावधान सीमित हैं। यदि इन अनुच्छेदों में बदलाव करना हो, तो इसके लिए संसद में संवैधानिक संशोधन (Constitutional Amendment) की जटिल प्रक्रिया अपनानी पड़ती है, जिसमें व्यापक राजनीतिक सहमति जरूरी होती है।
बदली जिंदगी : बैंक से डरने वाली सकीना बनी आत्मनिर्भर उद्यमी, रोज़ 6-7 हजार की कमाई
छत्तीसगढ़ की “बिहान” योजना (SRLM) के तहत डाड़गांव की सकीना की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। पहले बैंक जाने से घबराने वाली सकीना अब स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर उद्यमी बन गई हैं। डीएमएफ से मिली सीमेंट मिक्सर मशीन और शटरिंग प्लेट्स तथा 60,000 रुपये के ऋण से उन्होंने निर्माण कार्यों में अपना व्यवसाय शुरू किया, जिससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 6,000–7,000 रुपये की आय हो रही है।
पंचायतों को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव मजबूत कर रही सरकार – साय
पंचायती राज दिवस पर रायपुर में आयोजित पंचायत सम्मेलन में विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य और केंद्र की “डबल इंजन” सरकार पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत कर ग्रामीण विकास को गति दे रही है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों की अहम भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने अपने पंचायत स्तर से शुरू हुए राजनीतिक अनुभव साझा किए और विभिन्न योजनाओं—जैसे आवास, सड़क, डिजिटल सेवाएं और जल आपूर्ति—का उल्लेख किया। उन्होंने स्वच्छ, स्वस्थ गांवों के निर्माण, महिला सशक्तिकरण और विकास कार्यों की नियमित निगरानी पर बल दिया।
छत्तीसगढ़
बड़ा इजाफा : छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्राहकों की आय बढ़ी, 920 करोड़ रुपये भुगतान का अनुमान
छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्रहण को लेकर सरकार ने संग्राहकों की आय बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रति मानक बोरा दर 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये कर दी गई है, जिससे लाखों आदिवासी और वनवासी परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। इस वर्ष लगभग 15 लाख मानक बोरा संग्रहण का अनुमान है और करीब 920 करोड़ रुपये का भुगतान संग्राहकों को डीबीटी के माध्यम से किया जाएगा।
लाड़ली बहना योजना: नकद सहायता से आगे बढ़कर अब पशुपालन के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी
लाड़ली बहना योजना के तहत मध्य प्रदेश सरकार महिलाओं को हर महीने ₹1500 की आर्थिक सहायता दे रही है, जिससे करीब 1.25 करोड़ महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। अब सरकार इस योजना को आगे बढ़ाते हुए कृषि से जुड़ी महिलाओं को पशुपालन (गाय-भैंस) के लिए आर्थिक मदद देने की तैयारी कर रही है, ताकि वे दूध उत्पादन के जरिए स्थायी आय कमा सकें। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को सिर्फ सहायता राशि तक सीमित न रखकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। हालांकि विपक्ष इस राशि को बढ़ाकर ₹3000 करने की मांग कर रहा है, जिस पर सरकार भविष्य में विचार करने की बात कह रही है।
छत्तीसगढ़
दीदी के बखरी से बदली तस्वीर : कांकेर की 3,364 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, 25 हजार तक पहुंच रही मासिक आय
कांकेर जिला में “दीदी के बखरी” पहल के तहत महिलाएं सब्जी बाड़ी, मुर्गी पालन, मछली पालन और वनोपज संग्रहण से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। बिहान योजना के अंतर्गत 3364 महिलाएं इस मॉडल से जुड़ी हैं और हर महीने 20-25 हजार रुपए तक कमा रही हैं। आने वाले समय में 10,780 महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिल रही है।
विदेश
मन की बात: जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ बना देश के लिए मिसाल, कोरिया मॉडल की पीएम ने की सराहना
मन की बात के 132वें एपिसोड में नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के जल संरक्षण मॉडल ‘आवा पानी झोंकी’ की सराहना की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश के लिए गर्व की बात बताते हुए कहा कि जनभागीदारी से जल संरक्षण अब जन आंदोलन बन चुका है। उन्होंने बताया कि राज्य में जल संरक्षण, मत्स्य पालन, फिटनेस और खेलों को बढ़ावा देने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, प्रदेश में पेट्रोलियम और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सामान्य होने की जानकारी देते हुए लोगों से अफवाहों से दूर रहने की अपील की।
रायपुर
मगरमच्छ संरक्षण से बदली कोटमीसोनार की तस्वीर
पर्यटन और रोजगार को मिला नया आयाम