Bandhan Bank: संस्थापक चंद्रशेखर घोष का लंबा संघर्ष और दूरदर्शी सोच है, साइकिल से गांव-गांव घूमकर महिलाओं को छोटे कर्ज के फायदे समझाने वाले घोष ने एक छोटी-सी संस्था से शुरुआत की और बैंकिंग क्षेत्र की बड़ी पहचान बना दिया। बैंक ने हिस्सेदारी घटाकर करीब 10,600 करोड़ रुपए की रकम हासिल की। भारतीय रिजर्व बैंक के हिस्सेदारी संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुरूप उठाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, हिस्सेदारी अधिक होने के कारण बैंक की शाखाओं के विस्तार पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। हिस्सेदारी घटाने के बाद बैंक के विस्तार से जुड़ी नियामकीय स्थिति पर सबकी नजर बनी हुई है।
साधारण परिवार में बीता बचपन, छोटी उम्र से उठाई जिम्मेदारी
चंद्रशेखर घोष का जन्म वर्ष 1960 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान, बांग्लादेश है, के एक साधारण परिवार में हुआ था, छह भाई-बहनों में सबसे बड़े घोष का परिवार बड़ा था और घर में कुल 15 सदस्य रहते थे। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और ढाका विश्वविद्यालय से सांख्यिकी में एमए की डिग्री हासिल की।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प
महिलाओं को घरेलू प्रताड़ना जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता था। घोष का मानना था कि महिलाओं के पास अपनी आय का साधन होने से उनकी निर्णय लेने की क्षमता बढ़ सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने माइक्रोफाइनेंस यानी छोटे कर्ज के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में काम शुरू किया।बांग्लादेश में काम करते हुए मिला माइक्रोफाइनेंस का विचार
संगठन ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब समुदायों, खासकर महिलाओं के जीवन में सुधार लाने के लिए काम करता था। यहां काम करने के दौरान घोष ने करीब से देखा कि आर्थिक संसाधनों की कमी महिलाओं को किस तरह दूसरों पर निर्भर बना देती है।
रिश्तेदारों से उधार लिए ₹2 लाख और तीन कर्मचारियों से शुरुआत
चंद्रशेखर घोष ने वर्ष 2001 में पश्चिम बंगाल के कोन्नगर में बंधन-कोन्नगर नाम से संस्था की शुरुआत की। इसके लिए उन्होंने रिश्तेदारों से करीब दो लाख रुपये उधार लिए थे। शुरुआत बेहद छोटे स्तर पर हुई और शुरुआती टीम में केवल तीन कर्मचारी थे।







