Bastar Flood: इंद्रावती नदी में आई बाढ़ ने बस्तर के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं, कई मकानों को नुकसान पहुंचा और अब खेती के लिए लिया गया कर्ज भी किसानों के सामने बड़ी चुनौती बन गया है। बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई और कर्जमाफी की मांग को लेकर सैकड़ों किसान सड़कों पर उतर आए। किसानों ने ट्रैक्टरों के बड़े काफिले के साथ जगदलपुर पहुंचकर कलेक्टोरेट का घेराव किया। जगदलपुर में किसानों का यह प्रदर्शन खास रहा, क्योंकि पहली बार इतनी बड़ी संख्या में किसान सैकड़ों ट्रैक्टर लेकर शहर पहुंचे।
लालबाग मैदान और पीजी कॉलेज मैदान से अलग-अलग रैलियां निकाली गईं। दोनों रैलियों में शामिल किसान कलेक्टोरेट पहुंचे और शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शन में बस्तर के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री के नाम 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि बाढ़ ने केवल खेती को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि कई परिवारों की रोजी-रोटी और आर्थिक स्थिति पर भी गंभीर असर डाला है।
प्रति एकड़ 65,100 रुपए मुआवजे की मांग
किसानों ने बाढ़ में बर्बाद हुई फसलों के लिए प्रति एकड़ 65,100 रुपए मुआवजा देने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सरकार प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी करती है और समर्थन मूल्य 3,100 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है। इसी आधार पर किसानों ने पूरी फसल के नुकसान की भरपाई करने की मांग की है। इसके अलावा प्रभावित खेतों का वास्तविक सर्वे कराने और तत्काल पंचनामा तैयार करने की बात भी कही गई है। किसानों का तर्क है कि सर्वे में किसी भी प्रभावित किसान का नाम छूटना नहीं चाहिए, ताकि सभी पात्र किसानों को राहत मिल सके।
कृषि ऋण माफी और फसल बीमा की राशि जारी करने की मांग
बाढ़ प्रभावित किसानों ने कृषि ऋण पूरी तरह माफ करने की मांग की है। साथ ही राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC 6-4) के तहत प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत राशि देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसलों को हुए नुकसान का जल्द सर्वे कराने और बीमा राशि जारी करने की मांग रखी। उनका कहना है कि बाढ़ के बाद अगली फसल की तैयारी और खेती को दोबारा शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता बेहद जरूरी है। बीमा प्रीमियम जमा करने के बावजूद समय पर भुगतान नहीं मिलने से किसानों की परेशानी और बढ़ जाती है।
क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1.20 से 5 लाख रुपए तक सहायता
प्रदर्शन में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के मकानों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। किसानों ने पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1.20 लाख रुपए से लेकर 5 लाख रुपए तक सहायता देने की मांग की है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना में प्राथमिकता देने और मकानों के निर्माण एवं पुनर्निर्माण के लिए अतिरिक्त मजदूरी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई है। किसानों का कहना है कि जिन परिवारों के घर बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गए हैं, उनके लिए दोबारा आशियाना खड़ा करना बड़ी आर्थिक चुनौती है।महिला स्व-सहायता समूहों का बैंक कर्ज माफ करने की मांग
किसानों ने बाढ़ प्रभावित परिवारों से जुड़े महिला स्व-सहायता समूहों के बैंक ऋण माफ करने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि बाढ़ के कारण खेती और मकानों के साथ परिवारों की आय के दूसरे साधन भी प्रभावित हुए हैं। ऐसे हालात में समूहों के लिए बैंक ऋण की किस्तें चुकाना मुश्किल हो रहा है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए कर्जमाफी, फसल मुआवजा, बीमा भुगतान और मकान निर्माण सहायता पर जल्द निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि समय पर आर्थिक मदद नहीं मिली तो कई परिवारों के लिए खेती और सामान्य जीवन को फिर से पटरी पर लाना मुश्किल हो सकता है।












