BRICS Summit के 18वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने द्विपक्षीय संबंधों, चाबहार पोर्ट और वैश्विक राजनीति को लेकर कई अहम बातें कही हैं। एक विशेष मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने साफ किया कि भारत और ईरान की दोस्ती सदियों पुरानी है और आने वाले समय में दोनों देश मिलकर वैश्विक मोर्चे पर मजबूत भागीदारी निभाएंगे। भारत-ईरान संबंधों पर चर्चा करते हुए राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने कहा कि दोनों देशों का रिश्ता सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि हजारों साल पुराना और बेहद गहरा सांस्कृतिक है।
भारत और ईरान मिल कर करेंगे सहयोग
उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री के साथ मजबूत होते रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के साथ हमारे संबंध लगातार बेहतर हो रहे हैं। बढ़ते दबदबे और वैश्विक तानाशाही से मुकाबला करने के लिए भारत और ईरान मिलकर एक नया ढांचा तैयार करेंगे और एक-दूसरे का खुलकर सहयोग करेंगे।" क्षेत्रीय सुरक्षा और चाबहार पोर्ट से जुड़े सवाल पर ईरानी राष्ट्रपति ने बेबाकी से जवाब दिया। जब उनसे पूछा गया कि युद्ध के माहौल और हमलों की आशंका के बीच भारतीय निवेशक चाबहार में निवेश क्यों करें, तो उन्होंने स्थिति स्पष्ट की। पेजेश्कियान ने कहा, "ईरान ने कभी युद्ध की शुरुआत नहीं की।
भारतीय निवेशकों के लिए ईरान में अपार संभावनाएं
अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानवीय सिद्धांतों को दरकिनार कर हमारे देश पर बिना वजह हमला किया गया। जहां तक चाबहार का सवाल है, ईरान भू-राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। हम जल्द ही इस प्रोजेक्ट को पूरी गति से फिर शुरू करेंगे और इसमें दोनों देशों को एक-दूसरे की मदद की जरूरत है।" ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों और दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय निवेशकों के लिए ईरान में अपार संभावनाएं हैं और निवेश की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा, "भले ही कोई देश अपनी मर्जी से किसी पर एकतरफा प्रतिबंध थोप दे, लेकिन हम एक-दूसरे के साथ खड़े रहने के लिए प्रतिबद्ध हैं।अमेरिकी कार्रवाइयों ने बांटने के बजाए किया एकजुट
BRICS सम्मेलन का मूल उद्देश्य भी यही है कि सदस्य देश आपसी सहयोग बढ़ाएं। हम हर तरह की पार्टनरशिप के लिए हमेशा तैयार हैं।" पिछले छह महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव पर राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाइयों ने ईरानी जनता को बांटे जाने के बजाय और एकजुट कर दिया है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा, "अमेरिका को अपनी ताकत पर घमंड था, इसलिए उसने हमला किया। उन्हें लगा कि वे वेनेजुएला की तरह यहां भी कब्जा जमा लेंगे और अपनी मर्जी की कठपुतली सरकार बना देंगे, लेकिन उनकी यह सोच पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।"

