Chhattisgarh BJP: संगठनात्मक गतिविधियों के बीच प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी ने अपने प्रवास के दूसरे दिन पार्टी के सांसदों के साथ बैठक की। इस दौरान संगठन को मजबूत बनाने, सरकार के कामकाज में सुधार और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में सांसदों से सुझाव लेने के साथ उनके क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर भी फीडबैक लिया गया। बैठक के बाद सांसदों ने चर्चा के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी साझा की। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि संगठन और सरकार के कामकाज को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। स्मृति ईरानी ने भी प्रभावी कार्यप्रणाली को लेकर अपने सुझाव रखे।
बैठक के बाद सांसदों ने चर्चा के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी साझा की। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि संगठन और सरकार के कामकाज को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। स्मृति ईरानी ने भी प्रभावी कार्यप्रणाली को लेकर अपने सुझाव रखे। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते हुए संगठन, सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण हो जाती हैं। सभी के बीच बेहतर समन्वय और सामूहिक प्रयास से ही सरकार के कामकाज को प्रभावी बनाया जा सकता है। संगठन और सरकार मिलकर काम करेंगे।
सांसदों से लिया फीडबैक, योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा
सांसद विजय बघेल ने बताया कि स्मृति ईरानी ने सांसदों से अलग-अलग वन-टू-वन चर्चा की और उनके अनुभवों व सुझावों को जाना। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि संबंधित लोकसभा क्षेत्रों में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं किस तरह लोगों तक पहुंच रही हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर उनकी स्थिति को लेकर सांसदों ने अपनी बातें रखीं।विचारधारा और संगठनात्मक मजबूती पर मंथन
राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा के मुताबिक, बैठक में पार्टी की विचारधारा को जमीनी स्तर पर लागू करने और सत्ता तथा संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया गया। जनप्रतिनिधियों से सुझाव मांगे गए और संगठन को मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। लक्ष्मी वर्मा ने कहा कि स्मृति ईरानी छत्तीसगढ़ की परिस्थितियों से परिचित हैं और उन्हें उम्मीद है कि वह प्रदेश में संगठन की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाएंगी। बैठक में हुई चर्चा से स्पष्ट है कि भाजपा नेतृत्व का जोर सरकार के कामकाज और संगठनात्मक गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर है। साथ ही, जनप्रतिनिधियों के फीडबैक के जरिए सरकारी योजनाओं की पहुंच और कार्यकर्ताओं की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।






