Chhattisgarh Employee Federation: जनवरी 2026 से 2% डीए और कैशलेस इलाज की मांग, सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी
Chhattisgarh Employee Federation: राजनांदगांव में कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने जनवरी 2026 से 2% DA एरियर सहित देने और कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने की मांग की। मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
Chhattisgarh Employee Federation: बढ़ती महंगाई के इस दौर में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को बड़ी राहत देने के लिए छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।
फेडरेशन ने राज्य सरकार के सामने दो सूत्रीय मुख्य मांगें रखी हैं—पहला, जनवरी 2026 से दो प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) देय तिथि से एरियर के साथ दिया जाए; और दूसरा, कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। फेडरेशन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों की इन जायज और लंबे समय से लंबित मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। इस स्थिति की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
भारत स्काउट जिला कार्यालय में हुई अहम बैठक
इन गंभीर मुद्दों की रूपरेखा तय करने और रणनीति बनाने के लिए छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन, राजनांदगांव इकाई की एक महत्वपूर्ण बैठक स्थानीय भारत स्काउट जिला कार्यालय भवन (स्टेट स्कूल के पास) में संपन्न हुई। इस बैठक में जिलेभर से 32 विभिन्न कर्मचारी-अधिकारी संगठनों के जिला अध्यक्ष और प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई अन्य ज्वलंत मुद्दों पर भी लंबी चर्चा की गई और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शासन स्तर पर ठोस पहल करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
बैठकों में प्रमुख रूप से उठी ये दो मांगें
महंगाई भत्ता और एरियर: बैठक में मौजूद तमाम संघों के प्रतिनिधियों ने एक सुर में मांग उठाई कि सरकार जनवरी 2026 से प्रस्तावित दो प्रतिशत महंगाई भत्ते का भुगतान करे और इसका एरियर भी उसी तिथि से जोड़ा जाए।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा: लंबे समय से सुस्त पड़ी कैशलेस इलाज की योजना को अब और न टालते हुए तत्काल धरातल पर उतारने की पुरजोर मांग की गई।
पदाधिकारियों का कहना था कि बढ़ती महंगाई और स्वास्थ्य संबंधी अनिश्चितताओं के बीच इन दोनों विषयों पर सरकार को बिना किसी देरी के फैसला लेना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को वास्तविक आर्थिक और मानसिक राहत मिल सके। यदि मांगों को अनसुना किया गया, तो फेडरेशन अपनी अगली रणनीति के तहत सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगा।
बैठक में इनकी रही विशेष उपस्थिति
इस विचार-विमर्श और रणनीतिक बैठक में फेडरेशन के संरक्षक डॉ. के.एल. टांडेकर, जिला संयोजक सतीश ब्यौहरे, और जिला महासचिव पी.आर. झाड़े के साथ-साथ संतोष चौहान, डी.एल. चौधरी, एन.एल. देवांगन, अरुण देवांगन, पुष्पेंद्र साहू, हरीश भाटिया, परदेसी राम साहू, रमेश साहू, संजय तिवारी, प्रशांत सुखदेवे, महेश साहू सहित कई अन्य प्रमुख पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।