CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों का रवैया और कड़ा होता जा रहा है। देश के कोने-कोने में विरोध की गूंज सुनाई दे रही है। इस सियासी घमासान के बीच, सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी का रुख साफ करते हुए तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने दो टूक कहा कि विपक्ष इन मांगों को लेकर किसी भी सूरत में पीछे हटने वाला नहीं है।
क्या हैं खड़गे की 3 बड़ी मांगें?
खड़गे ने अपने सोशल मीडिया संदेश के जरिए पार्टी की रणनीति साझा की। उनकी पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। दूसरी मांग मतदाता सूची में चलाए जा रहे 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) को तुरंत रद्द करने की है। इसके साथ ही, तीसरी सबसे अहम मांग चुनावों में EVM की जगह पुरानी बैलेट पेपर व्यवस्था को वापस लाने की है।
देशभर में उग्र आंदोलन की तैयारी
कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि इन मुद्दों पर पार्टी के कार्यकर्ता और 'INDIA' गठबंधन के सहयोगी दल पूरे देश में मोर्चेबंदी कर रहे हैं। यही नहीं, उन्होंने यह भी ऐलान किया कि सिविल सोसाइटी और युवा संगठनों द्वारा जहां भी इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई जाएगी, कांग्रेस पूरी ताकत से उनके साथ खड़ी रहेगी।
SIR पर क्यों आमने-सामने हैं कांग्रेस और चुनाव आयोग?
मतदाता सूची के SIR अभियान को लेकर कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग पर हमलावर है। पार्टी को आशंका है कि लिस्ट में जिस तरह व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं, उससे असली और वैध मतदाताओं का नाम गायब हो सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को जरूरी बता रहा है। आयोग का कहना है कि SIR का मकसद मतदाता सूची को बिल्कुल साफ-सुथरा और सटीक बनाना है, ताकि फर्जी, डुप्लीकेट, मृत या अयोग्य लोगों के नाम लिस्ट से बाहर किए जा सकें।
जंतर-मंतर पर अनोखा प्रदर्शन, NSUI का अनूठा विरोध
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध का पारा काफी चढ़ा हुआ है। सोमवार को NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) के कार्यकर्ताओं ने एक अनोखा तरीका अपनाया। वे खुद पर सफेद चादर ओढ़कर जमीन पर लेट गए। प्रदर्शनकारियों का सवाल था— "जब हम जिंदा हैं, तो वोटर लिस्ट से हमारा नाम मुर्दा मानकर क्यों हटाया जा रहा है?" इसी प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की भी कांग्रेस ने कड़े शब्दों में निंदा की है। पार्टी ने दोहराया है कि चुनाव प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता लाने और देश के नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा के लिए उनका यह आंदोलन आगे भी इसी तरह जारी रहेगा।

