Elephant News: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में इंसानों और वन्यजीवों के बीच जुड़ाव की एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। करतला रेंज के काशीपानी जंगल में नौ हाथियों के झुंड में जन्मे नन्हे हाथी की ग्रामीणों ने छठी मनाई। इस मौके पर सात गांवों के लोग एकत्र हुए और नवजात हाथी का नाम ‘काशी’ रखा। नन्हे हाथी की छठी का आयोजन कारीपानी मंदिर के नीचे स्थित गौठान टिकरापारा में किया गया। इसमें रामभाठा, लबेद, पाहराभांठा, काशीपानी, छातापाठ, जामपानी और छुईडुंगा गांव के ग्रामीण शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान मंदिर में भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद लोगों के बीच भोजन प्रसादी का वितरण किया गया।
हाथियों से दूरी बनाए रखने की अपील
कार्यक्रम के दौरान एसडीओ मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों से हाथियों के झुंड के पास जाने या उन्हें परेशान करने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है। फिलहाल नौ हाथियों का झुंड काशीपानी जंगल में मौजूद है। वन क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं। जानकारी के मुताबिक, कुदमुरा क्षेत्र में 32 और चचिया में सात हाथी मौजूद हैं। हाथियों के कारण अब तक 17 किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की बात भी सामने आई है।

वर्ष 2000 में पहली बार पहुंचे थे कोरबा के जंगलों में हाथी
कोरबा जिले में हाथियों की मौजूदगी का इतिहास वर्ष 2000 से जुड़ा है। उस दौरान हाथियों का पहला आगमन कुदमुरा क्षेत्र के आमटिकरा में हुआ था। समय के साथ जिले में हाथियों की संख्या बढ़ती गई और कई बार इनकी तादाद 150 तक पहुंच चुकी है। नन्हे हाथी की छठी मनाने की परंपरा धिनारा गांव से शुरू हुई थी। अब काशीपानी में ‘काशी’ की छठी मनाए जाने के साथ यह परंपरा एक बार फिर चर्चा में है।ग्रामीणों का यह आयोजन जंगल में रहने वाले वन्यजीवों के प्रति उनके भावनात्मक जुड़ाव को भी दर्शाता है। हालांकि, हाथियों की मौजूदगी के बीच ग्रामीणों के लिए सतर्कता और सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।






