NPPA Notification: कैंसर के इलाज खर्च होने वाले लाखों रूपए बचाने की तैयारी है, केंन्द्र सरकार ने 137 कैंसर रोधी दवाओं पर मार्जिन की सीमा 30% तक कमी आ सकती है। नई 9 नवंबर से लागू होंगी । कैंसर बीमारी का इलाज मरीज और उनके परिवार के लिए केवल बीमार से लड़ने की चुनौती नही है, बल्कि इलाज के भारी खर्च को उठाना भी एक बड़ी परेशानी है। खासकर इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी में इस्तमाल होने वाली कुछ दवाओं की कीमत हजारों से लेकर लाखों रूपए तक पहुंच जाती है।
NPPA ने क्या लिया फैसला
केंन्द्र सरकार ने 17 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। उद्देश्य है उन दवाओं की कीमतों पर लगाम जगाना है। ताकि स्टॉकिस्ट, वितरक, खुदरा विक्रेता और अन्य बिक्री माध्यमों तक पहुंचने के दौरान काफी अधिक मार्जिन जुड़ जाता है।
इस व्यवस्था के तहत
- 137 कैंसर रोधी दवाए: इन ट्रेड मार्जिन की सीमा तय की गई है।
- 30% की सीमा: अधिसूचित अवाओं के लिए निर्धारित सीमा से अधिक कीमत जोड़ने की गुजाइश नही होगी।
- 9 नवंबर 2026 से लागू: संशोधित कीमतें इस तारीख से प्रभावी हाेंगी।
- अस्पतालों और दुकानों की जिम्मेदारी: दवाएं नई दरों पर बेची जाएं, इसके लिए अस्पतालों, मेडिकल संस्थानों और दवा विक्रेताओं को भी अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
सबसे मंहगी दवाओं में कितनी राहत मिल सकती है
कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले कुछ मरीजों की शरीर प्रतिरक्षा को कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ काम करने में मदद देने के लिए किया जाता है। इसमें इस्तेमाल होने वाली दवाओं में Pembolizumab और Atezolizumab शामिल है।कीमतें 70% तक कैसे घट सकती है
दवा की कीतमों में कमी को जानना जरूरी है कि ट्रेड मार्जिन और दवा बनाने की लागत अलग-अलग चीजें है। यदि किसी दवा की शुरूआती बिक्री कीमत कम है आगे की सप्लाई चेन में उस पर बहुत ज्यादा मार्जिन जोड़ा गया है।
कैंसर की 10 मंहगी दवाएं
कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ महंगी दवाओं की कीमतों का आंकड़ा कुछ ऐसे हो सकता है। ब्रांड,डोज, पैक और अस्पताल के हिसाब से वास्तविक खर्च अलग हो सकता है। जब तक NPPA की नई कीमतों अधिकारिक संशोधित MRP नही है।







