Prem Keetanu Movie Review: आज के दौर में जब हर हफ्ते नई फिल्में सिनेमाघरों या ओटीटी पर दस्तक देती हैं, तो हर किसी की तलाश एक अच्छी और Fresh Love Story की होती है। साजिद नाडियाडवाला की भांजी आफिया सैयद और वीर पहाड़िया की फिल्म 'प्रेम कीटाणु' को लेकर भी कुछ ऐसी ही उम्मीदें थीं। यह फिल्म दोस्ती और प्यार के बीच झूलती एक हल्की-फुल्की कहानी होने का दावा करती है। लेकिन क्या यह फिल्म वाकई दर्शकों के दिलों पर छाप छोड़ने में कामयाब होती है या फिर निराश करती है? आइए जानते हैं विस्तार से।
कहानी: दोस्ती, प्यार और उलझनों का ताना-बाना
फिल्म की शुरुआत सुहानी (आफिया सैयद) के साथ एक मजेदार वाकये से होती है। वह अपने पिता को गले लगाने के उत्साह में गलती से विशाल (वीर पहाड़िया) से लिपट जाती है। इस छोटी-सी गलतफहमी से शुरू हुई नोंकझोक जल्द ही एक अजीब से श्राप में बदल जाती है—दोनों एक-दूसरे को ताना मारते हैं कि अब वे अगले चार साल तक सिंगल ही रहेंगे। वक्त गुजरता है और एक शादी में दोनों की दोबारा मुलाकात होती है। यहीं से विशाल को एहसास होता है कि वह सुहानी को दिल दे बैठा है। लेकिन कहानी में असली मोड़ तब आता है जब सुहानी के दफ्तर में काम करने वाला रंजीत (अपारशक्ति खुराना) भी उसकी जिंदगी में एंट्री लेता है और उसे पसंद करने लगता है।
अभिनय: किसने किया प्रभावित और कहाँ चूके कलाकार?
- Veer Pahariya: फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसके मुख्य अभिनेता वीर पहाड़िया की अदाकारी साबित होती है। विशाल के किरदार में न तो प्यार की वह बेचैनी नजर आती है और न ही कॉमेडी का वह पंच जो दर्शकों को हंसा सके। फिल्म देखकर कई बार ऐसा लगता है कि विशाल को प्यार हो चुका है, लेकिन वीर के एक्सप्रेशन तक यह बात पहुँच ही नहीं पाई। वीर की उम्र 31 साल है और वह कॉलेज के छात्र के रूप में नजर आए हैं। सिर्फ उम्र कोई पैमाना नहीं है, मसलन, आमिर खान ने 44 की उम्र में 3 इडियट्स में कॉलेज स्टूडेंट का किरदार निभाया था और अपनी बॉडी लैंग्वेज से उसे जीवंत कर दिया था।
- Afia Syed: आफिया इस फिल्म से हिंदी सिनेमा में कदम रख रही हैं। उनका काम ठीक-ठाक है, हालांकि वीर के साथ उनकी केमिस्ट्री उस स्तर पर नहीं पहुँच पाती जैसी इस तरह की रोमांटिक फिल्म के लिए जरूरी थी।
- Aparshakti Khurana: रंजीत के किरदार में अपारशक्ति काफी नेचुरल लगे हैं। उनका कॉरपोरेट लुक और शालीन बॉडी लैंग्वेज उनके किरदार पर पूरी तरह फिट बैठती है। वह न तो जरूरत से ज्यादा ओवर-एक्टिंग करते हैं और न ही सीन को जबरन खींचते हैं।
- Nikhil Vijay: निखिल अपने कॉमिक टाइमिंग और बेहतरीन पंचलाइन से पूरा ध्यान खींच ले जाते हैं। मगन के किरदार में उनके डायलॉग बोलने का अंदाज बहुत बढ़िया है और कई दृश्यों में वह मुख्य अभिनेता से भी ज्यादा असरदार नजर आते हैं।
- Rakesh Bedi: सुहानी के पिता के रूप में राकेश बेदी ने अपने अनुभव का पूरा इस्तेमाल किया है। फिल्म के अंत में उनके हिस्से जो लंबे संवाद आए हैं, उन्हें उन्होंने बेहद परिपक्वता के साथ संभाला है।
निर्देशन और लेखन: कहाँ कमज़ोर पड़ गई फिल्म?
प्रेम कीटाणु असल में साल 2024 की बेहद लोकप्रिय मलयालम सुपरहिट फिल्म 'प्रेमलू' का हिंदी रीमेक है। मूल फिल्म को उसकी मासूमियत, हल्के-फुल्के मज़ाक और किरदारों के सहज स्वभाव के लिए बेशुमार प्यार मिला था। हिंदी वर्ज़न में हालांकि कहानी और किरदारों के परिवेश में बदलाव किए गए हैं। निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की के पिछले काम, जैसे वेब सीरीज Aspirants या 'सास बहू अचार प्राइवेट लिमिटेड, को देखते हुए इस फिल्म से काफी उम्मीदें थीं। एस्पिरेंट्स में दोस्ती और रिश्तों के समीकरण बेहद स्वाभाविक लगे थे। लेकिन 'प्रेम कीटाणु' में वह जादू गायब दिखता है।







