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देश
जमानत याचिका खारिज : पत्नी से क्रूरता करने वाले पति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जमानत खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने एक घरेलू हिंसा मामले की सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की और आरोपी पति को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि शादी किसी महिला के खिलाफ हिंसा करने का अधिकार नहीं देती और पत्नी की गरिमा, इच्छा और सम्मान का पूरी तरह सम्मान होना चाहिए। कोर्ट ने “जानवरों जैसा व्यवहार” करने की प्रवृत्ति को गंभीर अपराध बताते हुए ऐसी दलीलों को खारिज किया कि घटना केवल गुस्से या पारिवारिक विवाद का परिणाम थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा को सामान्य पारिवारिक विवाद की तरह नहीं देखा जा सकता, क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाता है।
कबीरधाम
कवर्धा ब्रेकिंग : दोस्ती का खूनी अंत, नशे की हालत में युवक ने दोस्त को उतारा मौत के घाट
छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के ठाकुर पारा में रविवार को दोस्ती के कत्ल का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। दो करीबी दोस्त, अमन ठाकुर और भैयालाल यादव, जो दिनभर साथ थे, शाम को साथ बैठकर शराब पी रहे थे। नशे के दौरान किसी मामूली बात पर विवाद शुरू हुआ, जो गाली-गलौज से बढ़कर खूनी संघर्ष तक पहुँच गया। आवेश में आकर अमन ठाकुर ने भैयालाल पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस वारदात के बाद इलाके में भारी तनाव और बवाल की स्थिति निर्मित हो गई, जिस पर पुलिस वैधानिक कार्रवाई कर रही है।
कारोबार
ITAT का फैसला : नोटबंदी के दौरान बैंक में नकद जमा पर किसान को आयकर विभाग से मिली बड़ी राहत,
गुजरात के एक किसान ने नोटबंदी (2016) के दौरान अपने बैंक खातों में 11.5 लाख रुपये जमा किए थे। आयकर विभाग ने इसमें से 6.8 लाख रुपये को बिना स्रोत वाली आय मानकर टैक्स और जुर्माना लगा दिया। किसान ने कहा कि यह पैसा उनकी कृषि आय, पुरानी बचत और बैंक से निकाली गई राशि का मिश्रण है, और इसके समर्थन में दस्तावेज भी पेश किए।
देश
22 साल बाद जेल से राहत, सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद-142 के तहत दी जमानत; ओडिशा हाईकोर्ट का फैसला पलटा
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ओडिशा में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी अर्जुन जानी उर्फ टुनटुन को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। आरोपी पिछले 22 वर्षों से जेल में बंद था और उसकी सजा के खिलाफ दायर अपील लगभग 3157 दिनों की देरी से दाखिल होने के कारण ओडिशा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी।
शिक्षा
RTE पर कोर्ट की सख्ती : 400 स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं, सरकार से मांगा जवाब
छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत कक्षा पहली में दाखिले की धीमी प्रक्रिया पर हाई कोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताई है। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि लगभग 387 स्कूलों में RTE के तहत एक भी आवेदन नहीं आया है, जिनमें अधिकतर बड़े निजी स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा 366 स्कूलों में सीटों के मुकाबले आवेदन बेहद कम हैं। इस पर हाई कोर्ट ने हैरानी जताते हुए सवाल किया कि क्या गरीब बच्चे बड़े स्कूलों में पढ़ना नहीं चाहते या फिर प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी है। अदालत ने यह भी आशंका जताई कि सरकार कहीं महत्वपूर्ण जानकारी छिपा तो नहीं रही है। डिवीजन बेंच ने शिक्षा सचिव को निर्देश दिया है कि वे 10 जुलाई तक शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब प्रस्तुत करें। साथ ही कोर्ट ने RTE के तहत सीटों और प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी ऑनलाइन सार्वजनिक करने का आदेश दिया है, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और अधिक से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
छत्तीसगढ़
ताड़मेटला नक्सली हमला केस : 76 जवानों की शहादत के आरोपी बरी, हाईकोर्ट ने खारिज की राज्य सरकार की अपील
ताड़मेटला नक्सली हमले (2010) में सीआरपीएफ के 76 जवानों की शहादत के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए सभी आरोपियों को दोषमुक्त रखा है।
छत्तीसगढ़
सुशासन तिहार 2026 : BJP विधायक के ‘चप्पल से मारेंगे’ बयान पर बवाल, पटवारी संघ ने किया बहिष्कार का ऐलान
गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक के पाटसिवनी में आयोजित सुशासन तिहार 2026 समाधान शिविर के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया। एक शिकायत में पटवारी पर 40 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप सामने आने के बाद स्थानीय भाजपा विधायक रोहित साहू ने मंच से सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए और कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा कि घूसखोरों को चप्पल से मारना चाहिए।
छत्तीसगढ़
CG High Court का बड़ा फैसला : कर्मचारी की मौत पर मुआवजे में ‘सैलरी कैपिंग’ खत्म, अब वास्तविक वेतन बनेगा आधार
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद मिलने वाले मुआवजे की गणना अब किसी तय या काल्पनिक वेतन सीमा (कैपिंग) के आधार पर नहीं होगी, बल्कि मृतक की वास्तविक सैलरी को ही आधार माना जाएगा।
ग्लैमर
गवर्नर का टीजर वायरल : आर्थिक तबाही के साथ खौफनाक कहानी लेकर आए मनोज बाजपेयी
गवर्नर का टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। फिल्म में देश के सबसे बड़े आर्थिक संकट, भ्रष्टाचार और सत्ता संघर्ष की कहानी दिखाई गई है। मनोज बाजपेयी एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी के किरदार में नजर आ रहे हैं, जो देश को आर्थिक तबाही से बचाने की कोशिश करता है। दमदार संवाद, डार्क विजुअल्स और थ्रिलर अंदाज ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। यह पॉलिटिकल-इकोनॉमिक ड्रामा 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
भाजपा
भाजपा की जीत पर मंत्री गजेन्द्र के कार्यालय में झालमुरी बांटकर मनाया गया जश्न
गंजपारा स्थित भाजपा कार्यालय में पश्चिम बंगाल, असम और पांडुचेरी में पार्टी की कथित जीत के दावे के बाद उत्सव मनाया गया। इस दौरान मंत्री गजेन्द्र यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने झालमुरी, मिठाई बांटी, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ खुशी जताई। मंत्री यादव ने इस जीत को जनता के विश्वास, कार्यकर्ताओं की मेहनत और शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता विकास, सुशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति जनता के समर्थन को दर्शाती है।
छत्तीसगढ़
शादी का झांसा : कृषि विस्तार अधिकारी को उम्रकैद, कोर्ट ने कहा- धोखा देकर शोषण अक्षम्य
छत्तीसगढ़ की एक विशेष अदालत ने देवनारायण साहू को अपनी कॉलेज सहेली के साथ दुष्कर्म और जातिगत उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने पाया कि आरोपी ने शुरू से ही शादी का झूठा वादा कर पीड़िता का शोषण किया और बाद में उसकी जाति के आधार पर उसे अपमानित कर संबंध से इनकार कर दिया। उसे भारतीय न्याय संहिता और SC/ST एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत सजा दी गई, जिसमें उम्रकैद, अन्य कारावास और जुर्माना शामिल है।
कांग्रेस
बोरे बासी पर सियासी घमासान : भूपेश बघेल ने मनाया दिवस, भाजपा ने बताया पिंडदान का प्रतीक
पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ इसे “बोरे बासी दिवस” के रूप में मनाया और इसे छत्तीसगढ़ की पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक पहचान बताया। उन्होंने भाजपा सरकार पर विकास कार्यों और योजनाओं के प्रचार को लेकर आलोचना भी की। इसके जवाब में भाजपा के मंत्री Gajendra Yadav ने इस आयोजन को राजनीतिक प्रचार बताया और कांग्रेस पर तंज कसते हुए विवादित टिप्पणी की। कुल मिलाकर, यह मुद्दा अब एक पारंपरिक व्यंजन से बढ़कर छत्तीसगढ़ की पहचान और राजनीति की बहस का प्रतीक बन गया है।