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महासमुंद
Raas Garba Mahotsav: मां दुर्गा उत्सव और रास-गरबा महोत्सव की तैयारियां शुरू, विधि-विधान से हुआ भूमिपूजन
Raas Garba Mahotsav: पिथौरा के अंजलि विहार कर्मचारी कॉलोनी में मां दुर्गा उत्सव एवं भव्य रास-गरबा महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। समिति द्वारा विधि-विधान से भूमिपूजन कर आयोजन का शुभारंभ किया गया। नवरात्रि के दौरान भव्य पंडाल, धार्मिक कार्यक्रमों और रास-गरबा महोत्सव का आयोजन आकर्षण का केंद्र रहेगा।
रायपुर
CG Forest Department Promotion: 18 रेंजर बने सहायक वन संरक्षक, रायपुर मुख्यालय से जारी हुई पदोन्नति सूची
CG Forest Department Promotion: छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 18 रेंजरों को पदोन्नति देकर सहायक वन संरक्षक (ACF) बनाया है। रायपुर मुख्यालय से जारी आदेश में पदोन्नत अधिकारियों की सूची जारी की गई है।
धर्म
Dongargarh News: मां बम्लेश्वरी देवी का नाम कैसे पड़ा? इतिहास और परंपरा में अलग-अलग दावे
Dongargarh News: डोंगरगढ़ की प्रसिद्ध मां बम्लेश्वरी के नाम और इतिहास को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। देवी के नाम की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग मान्यताएं सामने आने के बाद धार्मिक परंपरा, लोकविश्वास और ऐतिहासिक दस्तावेजों को लेकर बहस शुरू हुई है। इस मामले ने डोंगरगढ़ से जुड़ी पुरानी मान्यताओं को भी एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
स्टार्टअप
20 हजार रुपए से शुरू करें धूपबत्ती का स्टार्टअप , घर बैठे हर महीने हो सकती है अच्छी कमाई
छोटे शहरों में पूजा-पाठ, धार्मिक आयोजनों और मंदिरों के कारण धूपबत्ती तथा हवन सामग्री की मांग पूरे साल बनी रहती है। नवरात्रि, सावन, दीपावली और शादी-विवाह के सीजन में इन उत्पादों की बिक्री और बढ़ जाती है। इस स्टार्टअप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे घर के एक छोटे कमरे से भी शुरू किया जा सकता है।
सेहत
बिना चिपचिपी बनेगी साबूदाने की खीर, जानिए स्वाद बढ़ाने वाली खास रेसिपी
सावन और नवरात्रि जैसे व्रतों में पसंद की जाने वाली साबूदाने की खीर कई बार चिपचिपी हो जाती है। कुकिंग एक्सपर्ट नीलम गुप्ता के बताए आसान तरीके से साबूदाने को घी, ताजे नारियल और ड्राई फ्रूट्स के साथ भूनकर खीर बनाई जा सकती है। सही तरीके से भिगोना, दूध और चीनी डालने का सही समय रखने से खीर स्वादिष्ट, मलाईदार और दाने-दाने अलग बनती है।
यात्रा
झरने, गुफाएं, मंदिर और जंगल... कुदरत और संस्कृति का अनूठा संगम, छत्तीसगढ़ के 10 दर्शनीय स्थल
छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों का अनोखा संगम है। चित्रकोट जलप्रपात, मैनपाट, तीरथगढ़, कुटुंबसर गुफाएं, सिरपुर, भोरमदेव मंदिर, बारनवापारा अभयारण्य, डोंगरगढ़, गंगरेल बांध और बारसूर-दंतेश्वरी मंदिर राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं, जो हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
राजनांदगांव
डोंगरगढ़ : आस्था, इतिहास और आधुनिकता का अद्भुत संगम
छत्तीसगढ़ का डोंगरगढ़ मां बम्लेश्वरी मंदिर के कारण देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसका इतिहास राजा कामसेन और मां बम्लेश्वरी की स्थापना से जुड़ा है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान यहां भव्य मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशाल पदयात्राएं आयोजित होती हैं, जिनमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
धर्म
आस्था का केंद्र : दंतेश्वरी मंदिर का अद्भुत इतिहास और महिमा, शक्ति, संस्कृति और परंपरा का संगम
दंतेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की आस्था, संस्कृति और इतिहास का प्रमुख केंद्र है। शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम पर स्थित यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहाँ माता सती का दांत गिरने की मान्यता प्रचलित है। 14वीं शताब्दी में काकतीय वंश के राजा अन्नमदेव द्वारा निर्मित यह मंदिर अपनी प्राचीन स्थापत्य कला, जनजातीय परंपराओं और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
यात्रा
जहां प्रकृति बोल रही : छत्तीसगढ़ के कश्मीर में पर्यटकों को स्पर्श कर रहे बादल, फिज़ां में मधुर संगीत घोल रही हवाएं
चैतुरगढ़ छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की पहाड़ियों पर स्थित एक ऐतिहासिक और प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत किला है, जिसे “छत्तीसगढ़ का कश्मीर” कहा जाता है। समुद्र तल से लगभग 3000 फीट ऊंचाई पर बसे इस किले तक पहुंचने का सफर घने जंगलों, घुमावदार रास्तों और मनमोहक वादियों से होकर गुजरता है। कलचुरी राजाओं द्वारा निर्मित यह किला अपनी सामरिक मजबूती और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
छत्तीसगढ़
करोड़ों संतानों की एक ही मां : घुचापाली की वह मां जिनके चरणों में पनपता है विश्वास, वात्सल्य और वरदान
मदर्स डे सिर्फ सांसारिक मां के वात्सल्य को नमन करने का दिन नहीं, उस आदि शक्ति को स्मरण करने का अवसर भी है, जो समस्त सृष्टि की जननी हैं। मदर्स डे के अवसर पर प्रस्तुत यह विशेष फीचर महासमुंद जिले के बागबाहरा स्थित घुचापाली पहाड़ी पर विराजित मां चंडी की महिमा का भावपूर्ण वर्णन है। लोकआस्था का केंद्र हैं। प्राकृतिक पाषाण स्वरूप में विराजी मां की गोद में हरियाली, अथाह जल, शिलाएं और सुख-समृद्धि का विस्तार भक्तों को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव देता है। करोड़ों श्रद्धालुओं की वह सार्वभौमिक मां हैं, जो बिना भेदभाव सभी की प्रार्थनाएं सुनती हैं, कष्ट हरती हैं और अपनी ममता से सबको आच्छादित करती हैं। यहां आने वाला हर श्रद्धालु मां के स्नेह और शक्ति का साक्षात अनुभव करता है।
छत्तीसगढ़
आस्था की आड़ में घिनौना खेल, जांजगीर-चांपा में ढोंगी बाबा गिरफ्तार, हिमाचल से दबोचा गया आरोपी
चैत्र नवरात्रि के दौरान आरोपी पदयात्रा करते हुए पामगढ़ पहुँचा। उसने खुद को चमत्कारी बताकर शारीरिक दर्द से परेशान पीड़िता को इलाज का झांसा दिया और उसका मोबाइल नंबर ले लिया। 26 मार्च को बाबा ने पीड़िता को प्रसाद खिलाकर सम्मोहित किया और उसे अपने साथ मध्य प्रदेश के मैहर ले गया। वहां एक होटल में उसने महिला के साथ बार-बार दुष्कर्म किया और उसकी अश्लील तस्वीरें खींच लीं।
महासमुंद
मेरा गांव : प्रकृति, परंपरा और परिवर्तन के बीच संतुलन साधता जीवंत गांव कौंदकेरा
कौंदकेरा एक ऐसा गांव है, जहां प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक भावना का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। यह गांव जहां अपनी परंपराओं से शक्ति प्राप्त करता है, वहीं आधुनिक चुनौतियों से जूझ भी रहा है। आवश्यकता है संतुलित विकास और सामाजिक जागरूकता की, ताकि यह गांव अपनी पहचान को बनाए रखते हुए भविष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ा सके।