"वन्यजीव संरक्षण" के लिए 55 परिणाम मिले
छत्तीसगढ़
वन विभाग की रेड : मादा नीलगाय का शिकार कर मांस पकाने की तैयारी, 2 गिरफ्तार, 4 फरार
पिथौरा वन परिक्षेत्र में ग्रामीणों ने एक मादा नीलगाय का शिकार कर उसका मांस पकाने की तैयारी की, लेकिन सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि चार फरार हैं। सभी पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं एक अलग घटना में घायल हिरण का उपचार कर उसे जंगल में छोड़ दिया गया।
यात्रा
काले हिरणों की वापसी : छत्तीसगढ़ बना वन्यजीव पुनरुद्धार का नया उदाहरण
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में काले हिरणों (ब्लैकबक) का सफल पुनरुद्धार किया गया है। 1970 के दशक में विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति को 2018 से शुरू हुई वैज्ञानिक योजना और 2026 तक चले संरक्षण प्रयासों के बाद फिर से स्थापित किया गया, जिसकी संख्या अब लगभग 200 तक पहुँच गई है। फरवरी 2026 में 30 काले हिरणों को “सॉफ्ट रिलीज” तकनीक से प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया।
छत्तीसगढ़
टीम पर हमला : तोतों की तस्करी करने वाले 4 आरोपी गिरफ्तार, मुख्य सरगना अब भी फरार
कांगेर घाटी नेशनल पार्क और वन विभाग की टीम ने संजय मार्केट (जगदलपुर) में अवैध वन्यजीव तस्करी के खिलाफ छापा मारा, जहाँ 15 दुर्लभ तोते बरामद हुए। कार्रवाई के दौरान आरोपियों ने टीम पर हमला कर कुछ तोते लेकर फरार होने की कोशिश की। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि 1 आरोपी फरार है। मामले की जांच जारी है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
छत्तीसगढ़
क्रूरता की हदें पार : तेंदुए को कुल्हाड़ी से मार कर खा गए मांस, खाल बेचने की फिराक में 5 शिकारी गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में वन विभाग ने गीदम रेंज के गुमलनार इलाके में तेंदुए के शिकार और उसकी खाल की तस्करी के मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने पहले लोहे के फंदे से तेंदुए को पकड़ा, फिर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी और मांस खा लिया, जबकि खाल बेचने की कोशिश कर रहे थे।
यात्रा
छत्तीसगढ़ का गौरव : बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी को मिली राष्ट्रीय पहचान
छत्तीसगढ़ के बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में काले हिरणों (ब्लैकबक) के सफल पुनर्स्थापन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सराहा गया, जिससे राज्य के संरक्षण प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान मिली। 1970 के दशक के बाद अतिक्रमण और आवास क्षरण के कारण यहां से काले हिरण लगभग विलुप्त हो गए थे, लेकिन 2018 में राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्वीकृति के बाद पुनर्स्थापन योजना शुरू की गई। वैज्ञानिक प्रबंधन, बेहतर आवास व्यवस्था, पशु चिकित्सा देखभाल और निरंतर निगरानी के कारण इनकी संख्या बढ़कर लगभग 200 तक पहुंच गई है।
गरियाबंद
गजब का प्रस्ताव : छोटू देख नहीं सकता और विभाग कह रहा है वंश में वृद्धि करने जंगल जाओ
छोटू की कहानी दरअसल एक वन्यजीव की नहीं, उस सोच की कहानी बन गई है जहां संरक्षण और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बार-बार डगमगाता नजर आता है। यह फैसला अगर उसे सम्मानजनक जीवन देने की कोशिश है, तो उसकी तैयारी कहीं नजर नहीं आती।
रायपुर
मगरमच्छ संरक्षण से बदली कोटमीसोनार की तस्वीर
पर्यटन और रोजगार को मिला नया आयाम